मनमानी पर उतारू टीएचडीसी

Tehri Updated Wed, 26 Sep 2012 12:00 PM IST
नई टिहरी। असेना में खनन नियमों की धज्जियां उड़ाने के बाद टीएचडीसी ने कोटेश्वर बांध क्षेत्र में भी कुछ ऐसा ही कारनामा कर दिखाया है। यहां दो साल से बिना अनुमति स्टोन क्रेशर का संचालन किया जा रहा है। साथ ही भारी मात्रा में रेत और कंक्रीट जमा की गई है। इस मामले में प्रशासन ने टीएचडीसी को नोटिस जारी एक सप्ताह के भीतर एक करोड़ 60 लाख की रायल्टी जमा करने को कहा है।
प्रशासन के अनुसार अलग-अलग स्थानों पर टीएचडीसी ने लगभग 60 हजार घन मीटर रेत व कंक्रीट जमा कर रखा है। जबकि कोटेश्वर क्षेत्र में बांध की झील होने के कारण दूर-दूर तक रेत नहीं है। साथ ही पत्थर भी बेहद कम मात्रा में उपलब्ध है। इसके बावजूद इतना रेत और पत्थर कहां से जमा किया गया, इस सवाल का जवाब अभी तलाश किया जाना है। इस मामले में 22 सितंबर को टीएचडीसी को नोटिस जारी किया गया है। प्रशासन के अनुसार धनराशि जमा न करने पर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया जाएगा।

रायल्टी नहीं मिली तो मुकदमा
कोटेश्वर में स्टोन क्रेशर चलाने व रेत व कंक्रीट जमा करने के लिए टीएचडीसी ने कोई अनुमति नहीं ली है। नोटिस जारी कर उन्हें एक सप्ताह का समय रायल्टी जमा करने को दिया गया है। यदि निर्धारित समय के अंतर्गत रायल्टी जमा नहीं होती है तो एफआईआर दर्ज भी हो सकती है।-डा.रंजीत कुमार सिन्हा डीएम टिहरी

सवालों से बच रहा टीएचडीसी
कोटेश्वर बांध क्षेत्र में सामने आए मामले पर टीएचडीसी प्रबंधन किसी भी सवाल का जवाब देने से बच रहा है। क्या कोटेश्वर बांध क्षेत्र में बिना अनुमति क्रशर का संचालन किया जा रहा है? कोटेश्वर में जमा खनन सामग्री कहां से लाई गई? टीएचडीसी के महाप्रबंधक डीके गोविल ने इन सवालों का जवाब नहीं दिया। वे बस एक ही बात दोहराते रहे ‘हमें कोई नोटिस नहीं मिला है’।

असेना में भी हुआ खेल
नई टिहरी। टीएचडीसी पर 2002 से पहले असेना में नियमों को ताक पर रखकर खनन करने का आरोप है। प्रशासन के अनुसार इस क्षेत्र में जहां खनन किया गया था वहां पौधरोपण नहीं हुआ। यहां तक की खोदी गई भूमि को समतल भी नहीं किया गया। डेढ़ मीटर की अनुमति पर 10 मीटर से अधिक गहराई तक खुदाई की गई। इस मामले में भी प्रशासन स्तर पर जांच चल रही है।

चार गांव जूझ रहे है भूस्खलन की समस्या से
नई टिहरी। कोटेश्वर डैम व झील के कारण क्षेत्र के चार गांव भूस्खलन के जद में है। 2010 में झील का जल स्तर बढ़ने पर टीएचडीसी ने अत्यधिक पानी छोड़ना शुरू किया तो कोटेश्वर डैम के समीपवर्ती आली, जौरासी, पयालगांव व डोभालगांव भूस्खलन शुरू हो गया था। तब से इन गांवों में भूस्खलन की समस्या लगातार बढ़ती जा रही है। बरसात के दिनों मेें जीरो ब्रिज से कोटेश्वर जाने वाली सड़क अवरुद्ध होने से इस क्षेत्र के लोगों को आवागमन करने में दिक्कतों से जूझना पड़ता है।

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