नदियों व गदेरों में डाले जा रहे मलबे से दूषित हो रहा पानी व कम हो रही मछलियां

Dehradun Bureauदेहरादून ब्यूरो Updated Sun, 25 Oct 2020 09:39 PM IST
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जलीय पारितंत्र, वन्य जीव एवं हिमालय नदीवर्ती पेड़-पौधों के संरक्षण व संवर्द्धन को लेकर वन प्रभाग द्वारा दो दिवसीय कार्यशाला आयोजित की गई। जलीय जीवों, विशेषकर मछली के संरक्षण पर चर्चा कर सुरक्षा और वंश वृद्धि पर विचार-विमर्श कर योजना बनाने पर जोर दिया गया।
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कार्यशाला का उद्घाटन भारतीय वन्यजीव संस्थान देहरादून के वैज्ञानिक डा. जेए जॉनसन व डा. के शिवकुमार ने किया। इस मौके पर उन्होंने जलीय पारिस्थितिकी के बारे में विस्तार से जानकारी दी। सड़क, पुल, बांध और अन्य निर्माण का मलबा नदियों, गाड़-गदेरों में डालने से जहां मछलियों की संख्या में प्रतिवर्ष कमी हो रही है। वहीं, पानी की स्वच्छता भी प्रभावित हो रही है। बीते दस वर्षों में महासीर मछली की संख्या, उसके आकार व भार में निरंतर कमी आ रही है, जो चिंता का विषय है। डा. जॉनसन ने उत्तराखंड की नदियों व गाड़-गदेरों में मिलने वाली मछली प्रजातियों के बारे में बताया। इसके बाद छह सदस्यीय वैज्ञानिक दल ने संगम पर मंदाकिनी व अलकनंदा नदी समेत पुनाड़ गदेरा का भ्रमण कर वहां पाई जाने वाली मछलियों की स्थिति का अध्ययन किया। कार्यशाला में डीएफओ वैभव कुमार, रेंजर गौरव नेगी समेत कई मौजूद थे।

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