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दुष्कर्म का कृत्य करने वालों को फांसी देने की मांग उठाई

Haldwani Bureauहल्द्वानी ब्यूरो Updated Sat, 07 Dec 2019 12:27 AM IST
रुद्रपुर के सखी वन स्टॉप सेंटर में आखिर कब तक निर्भया विषय पर हुए संवाद में विचार रखती महिलाएं।
रुद्रपुर के सखी वन स्टॉप सेंटर में आखिर कब तक निर्भया विषय पर हुए संवाद में विचार रखती महिलाएं। - फोटो : RUDRAPUR
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रुद्रपुर। हैदराबाद में महिला पशु चिकित्सक के साथ हुई हैवानियत की घटना का रुद्रपुर की महिलाओं ने कड़े शब्दों में निंदा की। साथ ही सामूहिक दुष्कर्म के चारों आरोपियों के पुलिस की ओर से किए गए एनकाउंटर को सही ठहराया।
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अमर उजाला के अपराजिता 100 मिलियन स्माइल्स के बैनर तले शुक्रवार को रुद्रपुर के सखी वन स्टॉप सेंटर में ‘आखिर कब तक निर्भया’ पर संवाद का आयोजन किया गया। इसमें समाजसेवी, पुलिस विभाग, गृहणियों और शिक्षा क्षेत्र की महिलाओं ने दुष्कर्म जैसे घृणित कृत्य करने वालों को फांसी देने की मांग उठाई। महिलाओं ने दुष्कर्म के चारों आरोपियों के शुक्रवार तड़के की ओर से पुलिस किए गए एनकाउंटर को सही ठहराया। उन्होंने समाज में महिलाओं के साथ बढ़ रहे अपराधों के लिए पुरुष प्रधान सोच और बेटियों की भेदभाव को प्रमुख वजह बताया।
हैदराबाद में दुष्कर्म के आरोपियों का एनकाउंटर सही कदम है। किसी भी संगठन को दुष्कर्म के आरोपियों के पक्ष में खड़ा नहीं होना चाहिए। इस तरह की सख्ती से महिलाओं के खिलाफ अपराधों में कमी आएगी। - कविता बडोला, केंद्र प्रशासक, सखी वन स्टॉप सेंटर।
हमारे समाज में आज भी कुछ जगहों पर बेटे के जन्म पर खुशी और बेटी पैदा होने पर बहू के साथ बुरा बर्ताव किया जाता है। बेटे को पब्लिक स्कूल और बेटी को मामूली स्कूल में पढ़ाया जाता है। हमारी सोच का यही फर्क महिलाओं के खिलाफ अपराध की वजह बनता है। - पार्वती देवी, प्रधानाचार्य, जीजीआईसी रुद्रपुर।
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अधिकांश बॉलीवुड फिल्मों में महिलाओं को उनके अभिनय के बजाय एक मनोरंजन की वस्तु के रूप में इस्तेमाल जाता है। इससे पुरुषवादी समाज की सोच प्रतिलक्षित होती है। यही सोच महिलाओं के लिए घातक है। - ललिता पांडे, सब इंस्पेक्टर।
दुष्कर्म जैसी घटनाएं होने के बाद हम हल्ला करते हैं लेकिन इससे बचाव के लिए पहले से सतर्क रहने की जरूरत है। जब आपको कोई वॉच करता और छेड़छाड़ का प्रयास करता है, वहीं अलर्ट होना पड़ेगा। - माधवी अवस्थी, निदेशक, संभव संस्था।
पुरुषवादी सोच महिलाओं के खिलाफ अपराध की प्रमुख वजह है। कई घरों में आज भी बेटियों को पूरी शिक्षा नहीं दी जाती है। बेटों को महिलाओं का सम्मान करने के संस्कार तक नहीं दिए जाते। - ममता कुशवाहा।
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आजकल इंटरनेट पर कम उम्र के बच्चे भी पोर्न साइट देखते हैं। इसके बाद उनके कदम भटकने लगते हैं। सरकार को चाहिए कि वह सभी प्रकार की पोर्न साइटों को बंद करे। - सीमा गुणवंत।
अगर समाज में बेटियों के साथ भेदभाव बंद हो जाए और उन्हें बेटों की तरह ही पूर्ण शिक्षा एवं सुविधा मिलने लगे तो उनके खिलाफ अपराध कम होंगे। समाज में महिलाएं आज भी उपेक्षित हैं। - दीक्षा जग्गा।
समाज में मां-बाप अपने बेटों को बहुत आजादी देते हैं। इसका वह गलत फायदा उठाते हैं। इसी वजह से महिलाओं के साथ दुष्कर्म, छेड़छाड़ जैसी घटनाएं बढ़ती हैं। - अफशीन बेग।
जो पुरुष महिलाओं के साथ दुष्कर्म करते हैं, उन्हें यह सोचना चाहिए कि उनको भी एक महिला ने ही जन्म दिया है। लेकिन आज साहिर लुधियानवी की रचना ...औरत ने जन्म दिया मर्दों को, मर्दों ने उसे बाजार दिया... समाज में चरितार्थ हो रही है। - रश्मि।
दुष्कर्म की घटनाओं की शुरुआत घरों से होती है। कई करीबी ही इस तरह के कृत्य करते हैं लेकिन लोग समाज के डर से घटनाओं को दबा देते हैं। इससे यह घटनाएं और बढ़ती हैं। अब जागरूक होने की जरूरत है। - अनुराधा।
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