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अर्जुन अवार्डी कनवासी के साथ फिर छलावा

Rudraprayag Updated Fri, 07 Nov 2014 05:30 AM IST
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रुद्रप्रयाग। वर्ष 1990 में बीजिंग एशियन गेम्स में रोइंग/नौकायन में स्वर्ण पदक और वर्ष 2001 में अर्जुन पुरस्कार विजेता सुरेंद्र सिंह कनवासी को प्रदेश सरकार ने फिर निराश किया है। बीते वर्ष स्वयं खेल मंत्री ने उन्हें वर्ष 2014 के लिए लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड देने का आश्वासन दिया था। लेकिन जब नाम घोषित हुए तो उसमें उनका नाम नहीं था।
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जनपद चमोली के कोलसो गांव (कर्णप्रयाग) निवासी एसएस कनवासी वर्ष 1981 में सेना में भर्ती हुए। वर्ष 1983 में सीएमई पुणे में तैनाती के बाद वर्ष 1984 में उनका चयन सेना से रोइंग/नौकायन में कोलकाता में नेशनल गेम्स के लिए हुआ। इसी वर्ष अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर खेलते हुए उन्होंने देश के लिए रजत पदक जीता।
11 साल के खेल करियर में उन्होंने राज्य, राष्ट्रीय और विश्व स्तर पर पांच स्वर्ण, तीन रजत और तीन कांस्य पदक जीते। लेकिन पीठ दर्द के कारण कनवासी वर्ष 1992 के ओलपिंक का हिस्सा नहीं बन पाए, जिससे उन्होंने खेल से सन्यास ले लिया।

कनवासी की विशेष उपलब्ध्यिां
वर्ष 1985 में मद्रास (चेन्नई) में स्टेट लेवल रोइंग/नौकायन में स्वर्ण पदक।
वर्ष 1987 में महाराष्ट्र में स्वर्ण पदक।
वर्ष 988 में नेशनल प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक।
वर्ष 1987 में नेशनल गेम्स में स्वर्ण पदक।
वर्ष 1990 में रूस (मास्को) में रजत पदक।
वर्ष 1990 में एशियन गेम्स में चीन में कांस्य पदक।
वर्ष 1991 में नेशनल चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक।
वर्ष 1992 में पीठ दर्द के कारण ओलंपिक में भाग न लेने के चलते खेल से सन्यास लिया।

अर्जुन पुरस्कार से हुए सम्मानित
29 सितंबर 2001 को भारत सरकार ने नई दिल्ली में सुरेंद्र कनवासी को अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया। खेल मंत्रालय में उन्हें ऑब्जर्बर की जिम्मेदारी भी दी। वर्ष 2003 में सूबेदार मेजर के पद पर बंगाल इंजीनियरिंग रुड़की तैनात हुए। 30 जून 2007 को कनवासी ऑरनरी कैप्टन रिटायर हुए। 18 अगस्त 2007 को साई (स्पोर्टस ऑथरिटी ऑफ इंडिया) में ट्रेनर नियुक्त किया।

उत्तराखंड सरकारों से मिली उपेक्षा --
वर्ष 2008 में उत्तराखंड सरकार ने कनवासी को टिहरी डैम में वाटर स्पोर्ट्स डेवलपमेंट के चीफ इंस्ट्रक्टर के तौर पर तैनात करने की बात की, लेकिन बाद में किया नहीं। उन्होंने ओएसडी पर्वतारोही के तौर पर भी वाटर स्पोर्ट्स के लिए प्रोजेक्ट तैयार किया, लेकिन समय पर तय भुगतान भी नहीं हुआ। वर्ष 2010/11 में उत्तराखंड पुलिस के जवानों को भी ट्रेनिंग दी, लेकिन यहां भी उन्हें मायूसी मिली।

इनका कहना है --
उत्तराखंड सरकारों ने मेरी उपेक्षा ही की..
मैंने सरकार से कभी कुछ नहीं मांगा। वर्ष 2008 में प्रदेश सरकार ने मुझे वाटर स्पोर्ट्स में चीफ इंस्ट्रक्टर का पद देने की बात कही। मैंने सरकार के उच्चाधिकारियों के कहने पर साई से इस्तीफा भी दिया, लेकिन आज तक चीफ इंस्ट्रक्टर तो दूर, मुझे भुगतान तक नहीं किया गया। बीते वर्ष सितंबर में देहरादून में खेल मंत्री दिनेश अग्रवाल ने मुझे वर्ष 2014 का लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड देने की बात कही, लेकिन निराशा ही हाथ लगी। मेरी प्रतिभा को सेना, देश और दुनिया ने समझा, लेकिन उत्तराखंड सरकार ने मेरी उपेक्षा की। - सुरेंद्र कनवासी नौकायन में अर्जुन पुरस्कार विजेता
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