यात्रा तो शुरू हुुई, सवाल बाकी

Rudraprayag Updated Mon, 05 May 2014 05:30 AM IST
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केदारनाथ। जलप्रलय के बाद साल 2014 की केदारनाथ यात्रा शुरू हो गई। केदारनाथ पैदल मार्ग सहित धाम में तीर्थयात्रियों के लिए निशुल्क ठहरने और खाने की व्यवस्था की गई है। लेकिन केदार यात्रा में स्थानीय लोगों की सहभागिता शून्य है। अब यह देखना है कि सरकार कितने दिनों तक फ्री सेवा तीर्थयात्रियों को देती है।
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पिछले वर्ष जून माह में आपदा आने के बाद धाम में अधिकतर होटल, लॉज और धर्मशालाएं ध्वस्त हो गई। अभी यहां काफी भवन आपदा की मार से बचे हुए हैं। कुछ भवनों को स्थानीय तीर्थ पुरोहितों ने साफ कराया है। लेकिन कुछ भवनों में अभी मलबा भरा हुआ है। श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति की सभी धर्मशालाएं ध्वस्त हो चुकी हैं। समिति ने किराए में कुछ कमरे लिए हुए हैं। जबकि प्रशासन ने कुछ भवनों का अधिग्रहण किया है। यात्रियों को इन भवनों और बेस कैंप व हेलीपैड में लगाए गए टैंट में ठहराया जा रहा है। बाबा का प्रसाद भी समिति ही दे रही है। समिति और जीएमवीएन की तरफ से धाम में निशुल्क भंडारे की व्यवस्था की गई है।
लेकिन स्थानीय व्यापारियों और तीर्थ पुरोहितों की सहभागिता नहीं होना सबसे ज्यादा खल रहा है। पूरे यात्रा रूट और धाम में स्थानीय रोजगार शून्य है। धाम मेें ना तो पूजा की थालियां है और ना ही अन्य कोई दुकानें। तीर्थ पुरोहितों के संगठन केदारसभा के अध्यक्ष शंकर बगवाड़ी और माधव कर्नाटकी का कहना है कि यदि शासन-प्रशासन धाम मेें स्थानीय लोगों को दोबारा से व्यवसाय करने की अनुमति देता तो बेहतर रहता। यात्रियों को स्थानीय लोगों के भवनों में ठहराया जा रहा है। लेकिन जब व्यापारियों की बात आती है, तो शासन सर्वेक्षण की बात कहता है। यह अच्छी बात है कि यात्रा शुरू हो गई। लेकिन रोजगार के बारे में भी सोचा जाना चाहिए। यात्रा मार्ग पर स्थानीय लोगों के ढाबों में भी प्रशासन का कब्जा है।
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