मेदनपुर के लोगों ने बनाई सड़क

Rudraprayag Updated Sun, 26 Jan 2014 05:48 AM IST
रुद्रप्रयाग। जहां एक ओर केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) में आए दिन भ्रष्टाचार और अनियमितता के चर्चे रहते हैं, वहीं ग्राम पंचायत मेदनपुर में ग्रामीणों ने मनरेगा के तहत आधा किमी मोटर मार्ग का निर्माण कर योजना का सकारात्मक पहलू बताया है। अब गांव के बीच तक वाहन पहुंच रहे हैं। विकास विभाग की माने, तो मेदनपुर उत्तराखंड का पहला गांव है, जहां ग्रामीणों ने मनरेगा में सड़क बनाई।
298 की आबादी वाला मेदनपुर गांव सड़क मार्ग से सीधा जुड़ा नहीं हुआ है। मंदाकिनी नदी पार केदारनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग इसके सामने से होकर गुजरता है। वहीं तिलवाड़ा-रतनपुर-स्वीली-दरमोला मोटर मार्ग से भी यह अछूता रह गया था। मार्ग से गांव करीब आधा किमी दूर है। दोनों ओर सड़क होने के बावजूद गांव तक वाहन नहीं पहुंचने की टीस गांव के लोगों में थी।
जिला विकास अधिकारी सुनील कुमार बताते हैं कि मनरेगा में सड़क बनाने का सुझाव ग्रामीणों को दिया गया। कहा गया कि यदि फॉरेस्ट लैंड या भूमि संबंधी कोई विवाद नहीं है, तो गांव में वाहन पहुंचने का सपना सच हो सकता है।
ग्रामीणों की सहमति के बाद ब्लॉक में सड़क निर्माण का इस्टीमेट भेजा गया। 11 सितंबर 2012 से दरमोला मोटर मार्ग के पनगित तोक से सड़क बनाना शुरू हुआ। 22 जनवरी तक ग्रामीणों ने 3.20 मीटर चौड़ी और 500 मीटर सड़क बना दी।
मजदूरी में कमाएं लाखों
मनरेगा में सड़क निर्माण से ग्रामीणों को दोहरा लाभ हुआ है। चार लाख रुपये की लागत से निर्मित सड़क में तीन लाख 33 हजार 842 रुपये ग्रामीणों को मजदूरी के रूप में भुगतान हुआ है। सिर्फ 66 हजार 158 रुपये की सामग्री में व्यय हुई। इसमें 52 ग्रामीणों ने रोजगार हासिल किया, तो गांव तक सड़क भी पहुंच गई।

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