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सिमार गांव में खुशी का माहौल

Rudraprayag Updated Sun, 10 Feb 2013 05:31 AM IST
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रुद्रप्रयाग। बहुत अच्छा हुआ। हमें बहुत खुशी है। देशद्रोहियों का यही हश्र होना चाहिए। खुशी से भरे यह शब्द निकले ग्राम पंचायत सुमेरपुर के सिमार गांव की सुंदरा देवी के मुंह से।
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सुंदरा देवी के चचेरे जेठ विक्रम सिंह बिष्ट 13 दिसंबर 2001 को संसद भवन मुठभेड़ में आतंकवादियों की गोली के शिकार हो गए थे। संसद भवन में हमले के दोषी अफजल गुरु को फांसी देने की खबर से सुंदरा सहित पूरा गांव खुश है। गांववालों का कहना है कि यह काम बहुत पहले हो जाना चाहिए था। लेकिन गांववालों को इस बात का संतोष है कि देर से सही लेकिन इंसाफ मिला।

विक्रम के रिश्ते के भाई गुलाब सिंह कहते हैं कि सारा कुछ जानने के बाद भी अफजल को फांसी देने में वर्षों लगा दिए। अन्य दोषियों को भी सजा मिले तो दिवंगत विक्रम के लिए सच्ची श्रद्धांजलि होगी। ग्रामीण जागेश्वर बिष्ट का कहना है कि सरकार को आतंकवादियों के साथ सामान्य कैदियों से जैसा व्यवहार नहीं करना चाहिए। यदि कोई व्यक्ति देशद्रोह करता है तो बिना देरी उसे फांसी पर लटका देना चाहिए।

सिमार गांव के रहने वाले थे विक्रम बिष्ट
13 दिसंबर 2001 कोे संसद हमले में विकास खंड अगस्त्यमुनि की ग्राम पंचायत सुमेरपुर के सिमार गांव के विक्रम सिंह बिष्ट आतंकवादियों की गोलियों के शिकार हुए थे। विक्रम का गांव बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग पर सुमेरपुर बाजार से करीब तीन किमी दूर है। विक्रम एएनआई में कैमरामैन थे। 13 दिसंबर को कवरेज करते हुए एक गोली उनके गले में लगी थी। कई दिन अस्पताल में रहने के बाद घर आने के बाद उनकी मौत हो गई।

अस्त व्यस्त हो गया था परिवार
विक्रम को गोली लगने के बाद उनका परिवार अस्त व्यस्त हो गया। पत्नी सुनीता को पति की तीमारदारी के लिए दो बेटों सहित गांव छोड़ना पड़ा। इस दौरान वह प्राइवेट नौकरी कर खर्चा चलाती रहीं। इसी साल जनवरी माह में उनको राज्यसभा टीवी में नौकरी मिली है। दिसंबर 2012 में विक्रम की माता पार्वती देवी अपने बडे़ बेटे के पास दिल्ली चली गई। वर्तमान में विक्रम का परिवार दिल्ली में है। दूरभाष पर सुनीता ने बताया कि आज वह बहुत खुश हैं। लेकिन जब सभी दोषियों को सजा मिल जाएगी, तभी न्याय मिलेगा।

विक्रम के ससुर को सरकार से शिकायत
रुद्रप्रयाग। अफजल की फांसी से विक्रम के ससुर बचन सिंह रावत और सास कुसुमा देवी खुश हैं। यह साल उनके लिए खुशियां लेकर आया। पहले उनकी बेटी सुनीता को 12 साल बाद जनवरी माह में राज्यभा टीवी में नौकरी मिली। इसके बाद नौ फरवरी की सुबह 8.30 बजे अफजल गुरु की फांसी की खबर से उन्हें काफी सुकून मिला।
सुमेरपुर गांव से करीब आठ किमी दूर मरोड़ा गांव निवासी बचन सिंह को केंद्र और प्रदेश सरकार से शिकायत है। उनका कहना है कि जब संसद हमले में उनका दामाद मारा गया था, तो सरकारों ने बेटी की कोई मदद नहीं की। वह मनिंदर जीत सिंह बिट्टा का शुक्रगुजार करते हुए कहते हैं कि उनकी वजह से बेटी को नौकरी मिली। इससे पहले वह प्राइवेट जॉब कर परिवार का पेट पाल रही थी। बताया कि पूर्व मुख्यमंत्री बीसी खंडूरी ने भी मदद का आश्वासन दिया था, लेकिन किया कुछ नहीं।

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