पांडव नृत्य के बाद तरवाड़ी गांव में पूजा-अर्चना

Rudraprayag Updated Sat, 22 Dec 2012 05:30 AM IST
रुद्रप्रयाग। जिला मुख्यालय के समीप तरवाड़ी गांव में पांडव नृत्य आयोजन के समापन के बाद ग्रामीणों ने पूजा अर्चना की। देवताओं के विदा होने से पहले ग्रामीणों ने सुख समृद्धि का आशीर्वाद लिया।
ग्राम पंचायत दरमोला के तरवाड़ी गांव में एक माह तक पांडव नृत्य चला। नृत्य के समापन के मौके पर गैंडे का कौथिग आकर्षण का केंद्र रहा। अर्जुन द्वारा नागलोक में गैंडे का वध किया जाता है। जिससे अर्जुन और नागलोक के राजा नागार्जुन में युद्ध होता है। अर्जुन के गैंडे की खाल के साथ वापस लौटने के बाद राजा पांडू का श्राद्ध होता है। इसके लिए पांडव खेतों में हल लगाते हैं। पकने के बाद कटी फसल का आधा हिस्सा भगवान बदरीनाथ को चढ़ाया गया। जबकि आधा भाग ग्रामीणों में वितरित किया गया।
पांडव नृत्य समापन के बाद पांडव अगले साल आने का वादा कर र्स्वगारोहण पर निकल गए। स्थानीय निवासी किशन रावत ने बताया कि पांडव नृत्य का आयोजन गांव की खुशहाली के लिए किया जाता है। नृत्य के जरिए ग्रामीण अपनी पारंपरिक विरासत को संभालते आ रहे हैं। अब तीन साल बाद तरवाड़ी गांव में पांडव नृत्य की बारी आएगी।
इस अवसर पर कृपाल सिंह, भोपाल सिंह, वीर सिंह पंवार और मदन सिंह आदि उपस्थित थे।

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