इस हाल में रिजल्ट तो होगा ही जीरो

Rudraprayag Updated Sun, 09 Dec 2012 05:30 AM IST
रुद्रप्रयाग। प्रतियोगिताएं विज्ञान की, लेकिन प्रतिभागियों के साथ अंग्रेजी विषय का शिक्षक भेजा गया। प्रतियोगिताओं को गंभीरता से नहीं लिए जाने का खामियाजा छात्र-छात्राओं को भुगतना पड़ रहा है।
गत नवंबर में हल्द्वानी में हुई राज्य स्तरीय विज्ञान महोत्सव में जिले के जीइआईसी रुद्रप्रयाग और रतूड़ा सहित अन्य विद्यालयाें के 11 छात्र-छात्राओं ने प्रतिभाग किया। प्रतिभागियों के साथ मार्गदर्शक और अभिभावक के रुप में महोत्सव के जिला समन्वयक जीआईसी रुद्रप्रयाग में भौतिक विज्ञान के प्रवक्ता के साथ ही जीआईसी रतूड़ा के अंग्रेजी भाषा के सहायक अध्यापक को भेजा गया।
जीआईसी रतूड़ा में हाईस्कूल स्तर पर गणित/विज्ञान के तीन सहायक अध्यापक हैं, बावजूद इसके अंग्रेजी विषय के शिक्षक को भेजा गया। प्रतियोगिता में यदि विज्ञान के शिक्षक जाते, तो प्रतिभागियों का मार्गदर्शन करते। सामाजिक कार्यकर्ता नरेंद्र कंडारी कहते हैं कि विभाग की लापरवाही से पिछली बार की भांति इस बार भी महोत्सव से प्रतिभागी खाली हाथ लौटे। बच्चों को बिना तैयारी के औपचारिकता के लिए भेजा जाता है। इससे उनका भी मनोबल गिरता है। साथ ही महोत्सव में छात्राओं के साथ कोई शिक्षिका नहीं भेजी गई।


अवकाश पर थे शिक्षक
जीआईसी रतूड़ा के प्रधानाचार्य ओम प्रकाश सेमवाल का कहना है कि जिस दिन बच्चों को भेजा जाना था। उस दिन वे स्वयं और दो विज्ञान के शिक्षक अवकाश पर थे। अवकाश पर जाने से पूर्व विभाग द्वारा महोत्सव के संबंध में कोई सूचना नहीं दी गई थी।

प्रतियोगिता में जाने के लिए कोई शिक्षक तैयार नहीं था। रतूड़ा में विज्ञान शिक्षक अवकाश पर थे। इसलिए व्यवस्था बनाने के लिए अंग्रेजी विषय के अध्यापक को भेजा गया।
-हरी शंकर वर्मा, सीईओ रुद्रप्रयाग

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