पूस की रात में टिन शेड में कैसे कटेगी

Rudraprayag Updated Fri, 07 Dec 2012 05:30 AM IST
रुद्रप्रयाग। आपदा प्रभावित ऊखीमठ क्षेत्र में अभी भी स्थिति सामान्य नहीं हो पाई है। आपदा से हुए बेघर लोग सुरक्षित स्थानों में किराए के भवनों पर रह रहे हैं, या फिर रिश्तेदारों के यहां रह रहे हैं। हालांकि एक स्वयंसेवी संस्था द्वारा प्रभावित लोगों के रहने के लिए टिन की चादरों का का एक कमरा बनाया गया है। जिनमें ऊखीमठ जैसे ठंडे स्थान पर रात बिताना बहुत ही मुश्किल है। विगत सितंबर माह में जिले की ऊखीमठ और जखोली तहसील में आई आपदा में 55 आवासीय भवन ध्वस्त हो गए थे। प्रशासन के अनुसार 29 भवन गंभीर और 35 भवन आंशिक रुप से क्षतिग्रस्त हुए हैं। प्रशासन द्वारा प्रभावितों को अहैतुक सहायता वितरित कर दी गई है।
ऊखीमठ के आपदा प्रभावित लोगों के सुरक्षित आशियाने के लिए प्रशासन कॉरपोरेट सेक्टर और गैर सरकारी संगठनों की ओर ताक रहा है। फिलहाल प्रशासन को त्वरित रुप से 55 प्रीफेब्रिकेटेड भवनों के निर्माण लगभग डेढ़ करोड़ रुपये की आवश्यकता है।
प्रशासन ने शासन से 80 परिवारों को विस्थापन की मांग की है। इसमें प्रत्येक परिवार के विस्थापन में 5 लाख रुपये के औसत से 4 करोड़ रुपये. की आवश्यकता बताई गई है।
स्वैच्छिक संगठनों ने संभाली स्थिति
रुद्रप्रयाग। यदि आपदा प्रभावित लोगों की मदद के लिए विभिन्न एनजीओ, व्यापार संघ, शंाति कुंज हरिद्वार, राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ समेत अन्य संस्थाएं आगे नहीं आती, तो स्थिति विकट हो जाती। जहां आरएसएस और शंातिकुंज ने आपदा के वक्त ऊखीमठ पहुंचकर स्थिति संभाली। वहीं आपदा के बाद लोगों के अस्थायी घर बनाने के लिए लोक विज्ञान संस्थान (पीएसआई) और घरों से मलबे की सफाई का जिम्मा एटीआई ने उठाया।

13/14 और 15/16 सितंबर कोे हुई हुई मानव क्षति
गांव मृतक लापता घायल
किमाणा 6 9 2
ब्राह्मणखोली/प्रेमनगर 11 3 3
गिरिया 3 - -
मंगोली 10 0 1
चुन्नी 16 2 6
सेमला 2 - 2
योग 48 14 14

प्रमुख विभागों द्वारा मांगी गई मदद (लाख रु. में)
विभाग योजनाएं धनराशि की आवश्यकता
लोनिवि 65 2126.13
पेयजल 110 419.75
सिंचाई 129 774.35


प्रदेश सरकार छह करोड़ रुपये देकर अपनी पीठ थपथपा रही है। एनडीआरएफ के मानक ऐसे हैं, कि जो मरहम के बजाय घाव लगा रहे हैं। केंद्रीय मंत्री हरीश रावत ने प्रधानमंत्री से प्रति मृतक दो लाख रुपये देने का आश्वासन दिया था। वो भी पूरा नहीं हुआ। सीएम ने भी राहत कोष से क्षतिग्रस्त भवन पर राहत कोष से एक लाख रुपये देने की घोषणा की थी। आशा नौटियाल, पूर्व विधायक केदारनाथ क्षेत्र


हमारे घरों के अंदर बाहर मलबा है। सरकार आर्थिक मदद के नाम पर कुछ रुपये देकर चुप बैठ गई। यदि फिर बारिश आती है, तो स्थिति पहले से अधिक खराब हो जाएगी। राय सिंह धर्म्वाण, ग्राम प्रधान चुन्नी-मंगोली

मजिस्ट्रीयल जांच अंतिम चरण में है। कुछ लोगों के बयान लेने शेष रह गए हैं। रिपोर्ट शीघ्र जिलाधिकारी को सौंप दी जाएगी। राकेश तिवारी, एसडीएम ऊखीमठ

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