मेले की परंपरा टूटी, छुट्टी की रही कायम

Rudraprayag Updated Thu, 29 Nov 2012 12:00 PM IST
रुद्रप्रयाग। ऊखीमठ की आपदा से आम आदमी इस कदर दु:खी रहा, कि उसने मद्महेश्वर मेले की परंपरा को तोड़ दिया। मगर छुट्टी लेने की परंपरा का सरकारी सिस्टम ने पूरी तरह निर्वाह किया। केदार बाबा की उत्सव डोली के ऊखीमठ पहुंचने पर इस बार मेला नहीं लगा, मगर पूरे जिले में 27 नवंबर को सार्वजनिक अवकाश घोषित किया गया। आपदा से प्रभावित आम आदमी मेले से दूर रहा, मगर सरकारी मुलाजिमों ने छुट्टी का पूरा लुत्फ उठाया।
पूरा नवंबर माह छुट्टियों में गुजर गया। बावजूद इसके छुट्टियां रुदप्रयाग के सरकारी मुलाजिमों के लिए शायद ये छुट्टी कम पड़ी। ये ही वजह रही कि रुद्रप्रयाग के सरकारी दफ्तरों में मंगलवार को कोई काम नहीं हुआ। दिलचस्प बात ये है कि मुलाजिमों ने ये छुट्टी उस मेले के नाम पर मनाई, जो मेला हुआ ही नहीं। डीएम ने सार्वजनिक अवकाश घोषित किया और कार्मिकों की छुट्टी का पूरा पैकेज बन गया। एक दिन जिला स्तर की छुट्टी रही, तो दूसरे दिन यानी आज गजटेड छुट्टी का आनंद मिला।
प्रत्येक वर्ष मद्महेश्वर मंदिर के कपाट बंद होने के बाद डोली के शीतकालीन गद्दी स्थल ओंकारेश्वर मंदिर ऊखीमठ पहुंचने के मौके पर तीन दिवसीय मेला होता है। पहले दिन जिला प्रशासन की ओर से एक दिन का अवकाश घोषित किया जाता है। इस वर्ष आपदा के कारण मेले का आयोजन नहीं किया गया। इसकी जानकारी होते हुए भी छुट्टी की परंपरा को जारी रखा गया। नवंबर में 15 दिन भी कार्यालयों में काम नहीं हो पाया। माह में चार रविवार (4,11,18,25) और एक द्वितीय शनिवार (10) की छुट्टी के अलावा 12 नवंबर को नरक चतुर्दशी, 13 को दीपावली, 14 को गोवर्धन पूजा, 15 को भैयादूज का अवकाश रहा। इसके बाद 22 को हरिबोधनी, 27 को मद्महेश्वर मेला और 28 को गुरुनानक जयंती के अवकाश के चलते कार्यालय बंद रहे।
लोगों को एतराज
सामाजिक कार्यकर्ता अशोक चौधरी, नरेंद्र कंडारी और संपत्त सिंह जैसे तमाम लोगों ने मेला न होने के बावजूद सार्वजनिक अवकाश पर तीखी टिप्पणी जताई है। उनका कहना है कि सरकारी दफ्तरों में लगातार अवकाश रहने से कार्य प्रभावित हो रहा है।
प्रशासन की सफाई
स्थानीय कर्मचारियाें और लोगाें की भावनाआें के अनुसार ही 27 नवंबर को प्रशासन स्तर से सार्वजनिक अवकाश घोषित किया गया।-डॉ. नीरज खैरवाल, जिलाधिकारी रुद्रप्रयाग।

मद्महेश्वर मेले पर दिखा आपदा का अक्स
ऊखीमठ/गुप्तकाशी। केदारघाटी के प्रमुख मद्महेश्वर मेला पर भी ऊखीमठ त्रासदी का पूरा अक्स दिखाई दिया। मेले में न तो कोई रौनक दिखी और न ही किसी तरह का उत्साह। दिखी तो केवल खामोशी और पसरा हुआ सन्नाटा। मेले-कौथिगों के मौके पर दिखने वाला माहौल सिरे से गायब था।
देव डोली के साथ चल रहे भक्ताें के चेहराें पर भी पहले जैसे भाव नहीं थे, हर कोई जल्दी से जल्दी बाबा को शीतकालीन गद्दीस्थल पर विराजमान करना चाहता था। वहीं बाबा के पंचगाई में शामिल मंगोलचारी में बाबा की उत्सव डोली के पहुंचते ही माहौल भावुक हो उठा। बुधवार को द्वितीय केदार मद्महेश्वर की उत्सव डोली विभिन्न पड़ावाें से गुजरते हुए शीतकालीन गद्दीस्थल ओंकारेश्वर मंदिर ऊखीमठ पहुंची। सबसे भावुक क्षण तब आया जब बाबा की उत्सव डोली आपदा प्रभावित मंगोली गांव पहुंची। डोली के साथ चल रहे श्रद्धालुआें की आंखे मलबे के ढ़ेराें व उजड़े आशियानाें के बीच डोली की अगुवाई के लिए खड़े कुछ श्रद्धालु को देखकर छलक पड़ी, जबकि कपाट खुलने के समय बड़ी संख्या में धियाणियाें व ग्रामीणाें ने श्रद्धाभाव से बाबा की विदाई की थी। ब्राह्मणखोली निवासी बच्चीराम सेमवाल ने बताया कि उन्हाेंने अपने जीवन में पहली बार मेले के दौरान ऐसा सन्नाटा देखा है। मेले में शामिल होने न तो ध्याणियां आई और न ही श्रद्धालुआें की भीड़ जुटी।

शीतकालीन गद्दीस्थल विराजे बाबा मद्महेश्वर
ऊखीमठ। पंच केदाराें में द्वितीय केदार के नाम से प्रसिद्ध भगवान मद्महेश्वर की उत्सव डोली बुधवार को अपराह्न दो बजे शीतकालीन गद्दीस्थल ओंकारेश्वर मंदिर ऊखीमठ पहुंची। अब शीतकाल के छह माह बाबा की पूजा-अर्चना ओंकारेश्वर मंदिर में ही की जाएगी।
मद्महेश्वर धाम में स्थित मंदिर के कपाट 25 नवंबर को बंद होने के बाद उत्सव डोली गौंडार, रांसी, गिरिया गांव में प्रवास के बाद बुधवार को प्रात: नौ बजे ऊखीमठ को रवाना हुई। इस दौरान ग्राम वासियाें ने भगवान को अर्घ्य लगाया और आशीर्वाद लिया। चिलोंजी, फापंज, पाली होते हुए डोली 12 बजे मंगोलचारी (देवदर्शनी) पहुंची। पूर्व परंपरानुसार यहां पर कुछ देर के लिए बाबा की उत्सव डोली की पूजा-अर्चना की गई। इसके बाद डोली जवाहरनगर, ब्राह्मणखोली, डंगवाड़ी गांव होते हुए दो बजे ओंकारेश्वर मंदिर पहुंची। उत्सव डोली को परिसर मंडप में विराजमान कर चल-विग्रह मूर्ति को पुष्पाें से सुसज्जित बूढ़ा मद्महेश्वर की डोली में विराजमान किया गया। डोली को मंदिर की पांच परिक्रमा करवाकर मूर्ति को गर्भ गृह में स्थापित किया गया। इस अवसर पर पूर्व विधायक आशा नौटियाल, ब्लाक प्रमुख फते सिंह रावत, मंदिर समिति के कार्याधिकारी अनिल शर्मा और पुजारी टी. गंगाधर लिंग आदि उपस्थित थे।

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