नई पीढ़ी संभालेगी अब पांडव नृत्य की विरासत

Rudraprayag Updated Mon, 19 Nov 2012 12:00 PM IST
अगस्त्यमुनि। केदारघाटी के ग्राम पंचायत बड़ेथ ताल जामण में 12 वर्षों के बाद पांडव नृत्य का भव्य आयोजन शुरू हो गया है। इसमें युवाओं की भूमिका खासी महत्वपूर्ण बनने जा रही है। इस बार पांडवों के पुराने पश्वाओं (जिन पर देवता अवतरित होते हैं)का स्थान युवा पश्वा लेंगे।
बड़ेथ के पंचायती चौक में पांडव नृत्य के लिए दियू रस्म (दीपक जलाना) के साथ जाख नामक स्थान से पांडवों के बाणों को नृत्य के लिए बाहर निकाला गया है। पंचायती चौक में प्रतिदिन ढोल दमाऊं की थाप पर पुराने पांडव पश्वा नए पश्वाओं के साथ नृत्य कर रहे हैं। पांडव नृत्य समिति के अध्यक्ष सते सिंह पंवार ने बताया कि नृत्य डेढ़ माह तक चलेंगे। आयोजन का समय ग्रामीणों की सहमति से तय किया जाता है। कृष्णानंद नौटियाल के अनुसार पांडव के पश्वा वंशानुगत होते हैं। अलग-अलग परिवारों में विभिन्न पांडव पात्रों का निर्धारण प्राचीन समय से नियत होता आया है। इसी क्रम में कई सालों के अंतराल के बाद पीढ़ी दर पीढ़ी पांडवों के पश्वा बदलते रहते हैं।
पहली बार 20 वर्षीय लखपत सिंह बिष्ट पर भीम और 24 वर्षीय भरत सिंह भंडारी पर नकुल के पश्वा अवतरित होने हैं। इस दैवीय कार्य में खुद के चयन पर दोनों युवा अपना सौभाग्य समझते हैं। उनका कहना है पांडव हमारे आराध्य देवता तो हैं, साथ ही पहाड़ की संास्कृतिक जिम्मेदारी का निर्वहन करना भी हमारा नैतिक कर्तव्य है।
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पांडवों के जन्म लेते ही जयकारों से गूंजा बमणगांव
सैकड़ों लोग जागर में देवी-देवता की स्तुति में रहे तल्लीन
- भीम का पश्वा चट कर गया कई कद्दू, दही और मक्खन
- माता कुंती के पश्वा को नाचते-नाचते लाए मंडाल स्थल पर
चंबा (टिहरी)। क्षेत्र की खुशहाली और शांति के लिए बमणगांव में पांडव नृत्य के पांचवे दिन ढोल-दमाऊं, मशकबीन और रणसिंघों के साथ कुंती माता के पश्वा को मंडाण स्थल पर लाए। पांडवों के जन्म लेते ही मंत्रोच्चारण के साथ ही जयकारों गूंज उठे। देर रात तक सैकड़ों लोग जागर में अपने-अपने देवी-देवता की स्तुति में तल्लीन रहे।
नरेंद्रनगर प्रखंड के बमण गांव में चल रहे पांडव नृत्य के पांचवे दिन कई गांवों के लोग ढोल-दमाऊं, मशकबीन, रणसिंघों के साथ पांडव वन पहुुंचे। जहां प्राकृतिक रूप से अवतरित छड़ी की पूजा-अर्चना की गई। पांडवों के पश्वा आते ही एकदम से बड़ी-भारी इस छड़ी को जमीन से पूरा का पूरा उखाड़ दिया गया। छड़ी को कंधें पर रखकर मंडाण स्थल पर पहुंचाया गया। ढोल-नगाड़ों के साथ पांडवों की माता कुंती के पश्वा को चारपाई पर नाचते-नाचते मंडाण स्थल पर लाए। इसके बाद पांच पांडवों के अवतरित होते ही वेद की ऋचाओं का पाठ, शंख ध्वनि, घंटा-घड़ियाल और जयकारों से वातावरण गूंज उठा। भीम के पश्वा ने चार बड़े-बड़े कद्दू, दही और मक्खन को ऐसे चट कर दिया। इस दृश्य को देखकर तो ग्रामीण अपनी अंगुली दबाने को मजबूर हो गए। देर शाम जागर शुरू होता है। मान्यता है कि नौ दिनों में जो भी सच्चे दिल से यहां पहुंचेगा, उसकी मन्नत अवश्य पूरी होती हैं। इस मौके पर गिरीश बिजल्वाण, ईश्वरी प्रसाद बिजल्वाण, कुंवर सिंह, बुद्धि सिंह, हिमांशु बिजल्वाण, पूरण सिंह राणा आदि उपस्थित थे।


चक्रव्यूह के साथ रामा सिराईं महोत्सव शुरू
पुरोला(उत्तरकाशी)। चक्रव्यूह के मंचन के साथ ही कंडियाल गांव में तीन दिवसीय रामा सिराईं सांस्कृतिक एवं विकास महोत्सव शुरू हो गया। महोत्सव का उद्घाटन करते हुए ब्लाक प्रमुख लोकेंद्र रावत ने किया।
इस बार भी कंडियाल गांव में तीन दिवसीय रामा सिराईं सांस्कृतिक एवं विकास महोत्सव किया जा रहा है। रविवार को महोत्सव के उद्घाटन अवसर पर ब्लाक प्रमुख लोकेंद्र रावत ने कहा कि पारंपरिक मेलों को सरंक्षित रखकर इन्हें विकास मेलों का स्वरूप दिया जाना चाहिए। परंपराओं को आगे बढ़ाने में युवा पीढ़ी की महत्वपूर्ण भूमिका है। महोत्सव में पहले दिन डा.विनोद रोहणी द्वारा निर्देशित चक्रव्यूह का प्रदर्शन किया गया। चक्रव्यूह की रचना और इसमें शामिल कलाकारों के प्रदर्शन को ग्रामीणों ने खूब सराहा। तीन दिनों तक चलने वाले इस महोत्सव में चक्रव्यूह के साथ ही अन्य सांस्कृतिक कार्यक्रम भी होंगे। इस मौके पर आयोजन समिति के प्रताप पंवार, ग्राम प्रधान देवेंद्र जयाड़ा, धीरेंद्र कंडियाल, सुरपाल आर्य, प्रताप रावत, मेघनाथ सिंह जयाड़ा, फुलक सिंह कंडियाल भी मौजूद थे।
18यूकेआई5 व 6 फोटो।

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