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प्रसव पूर्व लिंग परीक्षण पर सख्ती से लगे रोक

Rudraprayag Updated Sun, 14 Oct 2012 12:00 PM IST
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रुद्रप्रयाग। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के तत्वावधान में जिला अस्पताल के सभागार में पीएनडीटी (प्रसव पूर्व लिंग निर्धारण तकनीकी) एक्ट पर एक दिवसीय सेमीनार आयोजित किया गया।
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सेमीनार का उद्घाटन करते हुए जिला जज जीएस धर्मशक्तू ने कहा कि महिलाओं की संख्या पुरुषों की अपेक्षा घटती जा रही है, यह गंभीर विषय है। डाक्टर और समाज को अपनी जिम्मेदारी समझनी चाहिए। कन्या भ्रूण हत्या को सहन नहीं किया जाना चाहिए।

सीएमओ डा. केडी शर्मा ने बताया कि गर्भ में पल रहे शिशु की लिंग की जांच करना अपराध है। इसलिए एक्ट बनाकर अल्ट्रासाउंड मशीन क्रय करने और भ्रूण परीक्षण करने के लिए सख्त नियम बनाए गए हैं। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अनिरुद्ध भट्ट ने कहा कि पीएनडीटी एक्ट की जानकारी आम आदमी को होनी चाहिए। आम आदमी के जागरूक होने पर कन्या भ्रूण हत्या जैसी कुरीति पर रोक लग सकती है। न्यायिक मजिस्ट्रेट मनोज द्विवेदी, जिला शासकीय अधिवक्ता अरुण बाजपेयी ने बताया कि कन्या भ्रूण हत्या से लिंगानुपात बिगड़ गया है। इसलिए कानून बनाना पड़ा। गर्भवती महिलाओं का अल्ट्रासाउंड परीक्षण सिर्फ गर्भ में पल रहे शिशु के स्वास्थ्य को देखने के लिए होना चाहिए। लिंग परीक्षण गंभीर अपराध है।

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