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लीद से छुटकारा, अब एडीबी का सहारा

Rudraprayag Updated Sat, 13 Oct 2012 12:00 PM IST
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रुद्रप्रयाग। गौरीकुंड-केदारनाथ पैदल मार्ग पर घोड़े-खच्चरोें की लीद सफाई व्यवस्था से जुड़ा बड़ा मुद्दा बन गया है। लीद के कारण सफाई अव्यवस्था पर हाईकोर्ट ने संज्ञान लेते हुए जिम्मेदार विभागों को टाइट किया है। लीद से छुटकारे के लिए अब एशियन डेवलपमेंट बैंक (एडीबी) का सहारा लिया जा रहा है। शुक्रवार को एडीबी की छह सदस्यीय टीम ने गौरीकुंड-केदारनाथ पैदल मार्ग और केदारनाथ धाम का स्थलीय निरीक्षण किया। यह टीम शासन के निर्देश पर यहां आई थी। शनिवार को टीम डीएम के साथ मिलकर प्रोजेक्ट पर चरचा करेगी। एडीबी का क्या प्लान निकलकर सामने आता है, अब उस पर सबकी निगाह है।
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पैदल मार्ग पर चलने वाले घोड़े-खच्चरों की लीद केदारनाथ के पैदल मार्ग और धाम क्षेत्र में बड़ी समस्या बना हुआ है। इसके अलावा तीर्थयात्रियों द्वारा छोड़ी गई पॉलीथिन की बरसाती, प्लास्टिक की बोतल और पैकेटबंद सामग्रियों के रेपर भी यहां पर्यावरण को प्रदूषित कर रहे हैं। बारिश होने पर लीद और गंदगी मंदाकिनी नदी में समा जाती है। इस समस्या से छुटकारा पाने के लिए शासन वृहद कार्ययोजना बनाने की सोच रहा है। तकनीकी और आर्थिक मदद के लिए एडीबी से एप्रोच की गई है। टीम लीडर माइकल के नेतृत्व में एडीबी की छह सदस्यीय टीम ने पैदल मार्ग के पड़ाव गौरीकुंड, जंगलचट्टी, रामबाड़ा, गरुड़चट्टी सहित केदारनाथ धाम का निरीक्षण किया। भ्रमण के दौरान जिला प्रशासन की ओर से एसडीएम ऊखीमठ राकेश तिवारी ने उनको स्थलीय परिवेश, मौसम, समस्या और जरूरत की जानकारी दी। टीम ने विभिन्न स्थानों पर फोटोग्राफी करते हुए लीद और कचरा निस्तारण के संभावित स्थलों की तलाश की।




अकेले जिला पंचायत पर न साधे निशाना
सफाई के मामले में सब जिम्मेदार: अध्यक्ष
अमर उजाला ब्यूरो
रुद्रप्रयाग। जिला पंचायत अध्यक्ष चंडी प्रसाद भट्ट का कहना है कि गौरीकुंड-केदारनाथ पैदल मार्ग पर सफाई के मामले में कुछ लोग बिना जानकारी के बयानबाजी कर रहे हैं। नैनीताल हाईकोर्ट के आदेश को राजनीतिक रूप दिया जा रहा है, जो कि गलत है। वर्तमान परिस्थितियों के लिए सिर्फ जिला पंचायत जिम्मेदार नहीं है, बल्कि प्रशासन, लोनिवि, घोड़े-खच्चर मालिक और व्यापारी सबकी सामूहिक जिम्मेदारी है। व्यवस्था कैसे सुधरे इसके लिए सभी को आत्मचिंतन करना होगा।
हाईकोर्ट ने जिला पंचायत सहित पांच एजेंसियों को केदारनाथ धाम और पैदल मार्ग पर सफाई व्यवस्था ठीक न होने पर आडे़ हाथ लिया था। इसके बाद एक अक्तूबर से जिला पंचायत ने प्रीपेड व्यवस्था से घोडे़-खच्चरों के संचालन पर रोक लगाई है। जिला पंचायत के इस निर्णय से कांग्र्रेस, सीपीएम, मजदूर यूनियन और तीर्थ पुरोहित समाज नाराज है। शुक्रवार को जिला पंचायत अध्यक्ष ने पत्रकारों से वार्ता करते हुए कहा कि कोर्ट ने मौखिक रुप से आदेशित किया है कि घोड़े-खच्चरों को रोका जाए। पैदल मार्ग पर सफाई ही अकेला इश्यू नहीं है। मार्ग पर घोड़े-खच्चर मजदूरों द्वारा तीर्थयात्रियों के साथ दुर्व्यवहार का भी न्यायालय में संज्ञान लिया है। पीक सीजन में मजदूर बिना प्रीपेड व्यवस्था के ज्यादा किराया वसूलते हैं, लेकिन राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि और विधायक सिर्फ सफाई को मुद्दा बनाकर जिला पंचायत को घसीट रहे हैं।

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