लोग मांगे सड़क, महकमा मांगे बजट

Rudraprayag Updated Tue, 02 Oct 2012 12:00 PM IST
आपदा के बाद ऊखीमठ क्षेत्र में सामुदायिक सुविधाओं का बुरा हाल हुआ है। जन जीवन को पटरी पर लाने का काम बहुत तेजी से नहीं हो पाया है। लोग चाहते हैं, कि उनके यहां की सड़कें जल्द से जल्द बन जाएं, ताकि यातायात की जिस परेशानी से वे गुजर रहे हैं, उस पर विराम लगे। लोग सड़क मांग रहे हैं, मगर विभागों की गाड़ी बजट पर अटकी है। बजट कब स्वीकृत होगा, कब रिलीज होगा, पता नहीं, मगर एक-एक दिन काटना लोगों को भारी पड़ रहा है।



छह करोड़ में सुधरेगी 13 सड़कों की सेहत
लोनिवि निर्माण खंड ऊखीमठ का आकलन
क्रासर-
एक करोड़ में अस्थाई रूप से होगा यातायात शुरू
मार्ग बंद होने से लोगों को उठानी पड़ रही है दिक्कत
रुद्रप्रयाग। लोनिवि निर्माण खंड ऊखीमठ ने दैवीय आपदा से क्षतिग्रस्त हुए 13 मोटर मार्गों को पूरी तरह से दुरुस्त करने के लिए छह करोड़ रुपये और अस्थाई रूप से चालू करने के लिए एक करोड़ रुपये का खर्च आंका है। वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में यातायात बाधित होने से गैस सिलेंडर, मिट्टी तेल और राशन आपूर्ति प्रभावित हो गई है। हालांकि कुछ सड़कों पर आंशिक रुप से यातायात शुरू हुआ है, लेकिन उन पर बड़े वाहन नहीं चल पा रहे हैं।
13 अप्रैल को बादल फटने और अतिवृष्टि से ऊखीमठ क्षेत्र में 13 सड़कें बाधित हो गई थी। लोनिवि को यातायात बहाल करने में काफी मशक्कत करनी पड़ रही है। कई स्थानों पर सड़क और पुलिया बहने के कारण हिल साइड में रोड तक काटनी पड़ रही है। हालांकि जखोली-भीरी, ऊखीमठ-मनसूना और मक्कू बैंड-पलद्वाड़ी मोटर मार्ग पर आंशिक रुप से यातायात बहाल हो गया है। वहीं लोनिवि ने कुंड-ऊखीमठ मोटर मार्ग पर 10 अक्तूबर तक यातायात शुरू कराने की बात कही है। लोनिवि के ईई रमेश चंद्र पाल ने बताया कि जिन स्थानों पर पुलिया बही हैं, वहां पर वायरक्रेट लगाकर सड़क खोली जा रही है। शीघ्र अन्य स्थानों में भी सड़क खोल दी जाएगी।

लोनिवि के पास एक ही जेसीबी
रुद्रप्रयाग। लोनिवि ऊखीमठ डिवीजन ने सड़क खोलने के लिए विभिन्न स्थानों में नौ जेसीबी और एक पोकलैंड लगाया हुआ है। डिवीजन में सिर्फ एक जेसीबी लोनिवि का अपना है। शेष आठ जेसीबी और पोकलैंड मशीन किराए पर ली हुई हैं। मशीनरी की कमी के कारण सड़क खोलने में देरी हो रही है।


सड़कें अवरुद्ध होना आम बात
पहाड़ में भूस्खलन और भू-धंसाव से हो रही दिक्कत
निर्माणाधीन मोटर मार्ग भी बन रहे भूस्खलन का कारण
अमर उजाला ब्यूरो
कर्णप्रयाग। गांवों को सड़क से जोड़ने की मुहिम को बीते कुछ वर्षों में आपदा पलीता लगा रही है। हालात इस कदर हैं कि राजमार्ग भी इससे अछूता नहीं है। घंटों से लेकर हफ्तों और महीनों तक सड़कों का अवरुद्ध होना अब आम बात हो गई है। बावजूद इसके समस्या के निस्तारण के लिए कार्यदायी संस्थाओं की ओर से कोई ठोस प्रयास नहीं किए जा रहे हैं।
राज्य निर्माण के बाद भले ही तेजी से सड़कों का निर्माण हुआ है, लेकिन पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन एवं भू-धंसाव की वजह से लोगों को इनका कम ही लाभ मिल पा रहा है। बरसात में कर्णप्रयाग, पिंडरघाटी, गैरसैंण एवं गौचर क्षेत्र के कई मोटर मार्ग प्रभावित हुए हैं। गत वर्ष नंदकेशरी-चिडिंगा मोटर मार्ग भूस्खलन एवं भू-धंसाव से सात माह तक बंद रहा, जबकि थराली-कुराड़-पार्था मार्ग बीते सवा माह से ठप है। सोलपट्टी को जोड़ने वाला थराली-डुंग्री एवं गोपेश्वर-पोखरी मार्ग भी आपदा का दंश झेल रहा है। क्षेत्र के कई निर्माणाधीन मोटर मार्ग भी भूस्खलन का कारण बने हुए हैं। वहीं ऋषिकेश-बदरीनाथ, कर्णप्रयाग-नैनीताल एवं कर्णप्रयाग-ग्वालदम मोटर मार्ग भी कई बार घंटों बंद रहते हैं।

सड़क निर्माणदायी संस्थाएं पहाड़ी क्षेत्रों में सड़काें के निर्माण में वैज्ञानिक तकनीक का प्रयोग करें, तो भूस्खलन एवं भू-धंसाव की समस्या से निजात मिल सकती है। ग्रीन रोड प्लान के तहत पहाड़ की कटिंग कम से कम कर नीचले हिस्से को लेंटर या भरान से भी सड़कें तैयार की जा सकती हैं।
- प्रो. एसपी सती भू-गर्भ विज्ञान एचएनबी केविवि श्रीनगर गढ़वाल

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