दावे कई, लेकिन हकीकत कुछ और ही

Rudraprayag Updated Fri, 28 Sep 2012 12:00 PM IST
केस नंबर एक : पर्यटन गांव त्रियुगीनारायण में पर्यटन दिवस के दिन गतिविधियां शून्य रहीं। यहां पर न कोई गोष्ठी हुई और न ही कोई कार्यक्रम। ग्रामीणाें से जब पर्यटन दिवस के बारे में पूछा गया तो उन्हाेंने मासूमियत से केवल इतना ही बताया कि शासन स्तर से गांव में पर्यटन ग्राम का एक बोर्ड आज ही लगा है तो हो सकता है आज का दिन पर्यटन दिवस कहा जाता हो!
केस नंबर दो : पर्यटन गांव सारी में भी पर्यटन दिवस के बारे में ग्रामीण अनभिज्ञ दिखे। किसी को पता ही नहीं है कि पर्यटन दिवस किसे कहते है और इसे आयोजित करने का क्या उद्देश्य है।

रुद्रप्रयाग। ये कुछ उदाहरण हैं, जिससे पता चलता है कि पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए जितना हो-हल्ला किया जा रहा है उसकी वास्तविकता क्या है। शासन स्तर से घोषित पर्यटन गांवाें के ग्रामीणाें को ही पर्यटन दिवस के संबंध में कुछ पता ही नहीं है तो अन्य गांवाें में स्थिति क्या होगी इसका अंदाजा स्वयं लगाया जा सकता है।
सरकार की ओर से राज्य में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएं संचालित की जा रही हैं। पर्यटन गांव घोषित कर गांव स्तर पर बुनियादी सुविधाएं मुहैया कराने और पर्यटन को बढ़ावा देने के तमाम दावे किए जाते हैं, लेकिन धरातल पर सभी दावे खोखले नजर आ रहे हैं। जहां पर्यटन दिवस पर पर्यटन विभाग की ओर से घोषित पर्यटन गांवाें में विभागीय गतिविधियां शून्य रहीं वहीं जिला मुख्यालय में भी विभाग ने संगोष्ठी का आयोजन कर अपनी जिम्मेदारियाें से इतिश्री कर ली। अब ऐसे में किस तरह पर्यटन स्थलाें को विकसित करने और इसे रोजगार का जरिया बनाने की कवायद सफल होगी, इसे लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है।
आपदा के कारण नहीं हुए कार्यक्रम
ऊखीमठ आपदा के कारण जिले में पर्यटन दिवस पर कोई कार्यक्रम आयोजित नहीं किए गए। हालांकि जिला मुख्यालय पर बेला खुरड़ में पौधारोपण किया गया। इसके साथ ही जिले में आने वाले अतिथियाें का स्वागत किया गया। - सीमा नौटियाल, जिला साहसिक और पर्यटन अधिकारी रुद्रप्रयाग।

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