जख्म भरने में अभी लगेगा समय

Rudraprayag Updated Tue, 25 Sep 2012 12:00 PM IST
ऊखीमठ। तहसील मुख्यालय के ब्राह्मणखोली, प्रेमनगर, किमाणा, मंगोली, चुन्नी, सेमला सहित गिरिया, बेडूला पाली, सरुणा सलामी में धीरे-धीरे स्थिति सामान्य हो रही है लेकिन प्रकृति ने प्रभावितों को जो मानसिक घाव दिए हैं, उनको भरने में अभी वक्त लगेगा। प्राकृतिक आपदा में लोगों ने अपने को खोया ही साथ ही जीवन भर की जमा पूंजी, मकान, खेत-खलिहान और रास्ते भी आपदा में खत्म हो गए। विभागों की ओर से विद्युत और पेयजल आपूर्ति की वैकल्पिक व्यवस्था कर लोगों को राहत पहुंचाने के प्रयास जारी हैं, लेकिन क्षति इतनी ज्यादा है कि जिंदगी को सुचारु रूप से पटरी पर लाने के लिए अभी वक्त लगेगा। जो जख्म प्रकृति ने दिए हैं जब वो भर जाएंगे तभी एक नई जिंदगी की शुरुआत होगी।

बिछानी होगी नई पेयजल लाइन
जल संस्थान ने रबर के पाइप जोड़कर जगह-जगह पेयजल आपूर्ति की वैकल्पिक व्यवस्था की है। पेयजल लाइनों के बाढ़ में बहने के कारण विभाग को यहां नए सिरे से लाइन बिछानी पड़ेगी। ग्रामीणों का पानी भरने का सहारा सड़क किनारे हैंडपंप भी बाढ़ में उखड़ गए।

खेतों में लगे मलबे के ढेर
पहाड़ी से आए मलबे और पानी से तबाह हुए घरों के मलबे ने खेतों में पकने को तैयार धान की फसल को नष्ट कर दिया। जहां धान की फसल दिखाई देती थी, वहां अब मलबे के ढेर हैं। डंगवाणी निवासी अर्जुन रावत बताते हैं कि उनके खेतों में इतना अनाज हो जाता है कि उनको बाजार से खरीदने की जरूरत नहीं पड़ती थी, लेकिन इस साल आपदा ने फसल बर्बाद तो की ही, खेतों को खेती के लायक भी नहीं छोड़ा।

स्थायी बिजली में लगेगा समय
ऊर्जा निगम की ओर से प्रभावित क्षेत्रों में वैकल्पिक व्यवस्था कर विद्युत आपूर्ति चालू की गई है, लेकिन मेन सप्लाई लाइन के पोल गाड़ने और स्थायी रुप से तार खींचने में समय लग जाएगा। ऊखीमठ विद्युत सब स्टेशन भी भू-धंसाव के कारण खतरे की जद में ह।

जाएं तो जाएं कहां
कुछ आवासीय भवन आपदा से पूरी तरह ध्वस्त नहीं हुए, लेकिन कमरों में मलबा भरने, दीवारों में दरार आने और भू-धंसाव के कारण ये रहने लायक नहीं रहे हैं। समस्या यह है कि आपदा से पूरा क्षेत्र प्रभावित है ऐसी स्थिति में लोग जाएं तो कहां जाएं।

तय कर रहे 100 किमी की अतिरिक्त दूरी
वर्तमान में कर्णप्रयाग-चमोली-गोपेश्वर-मंडल-चोपता घूमते हुए वाहन ऊखीमठ पहुंच रहे हैं। इसके लिए वाहनों को रुद्रप्रयाग से ऊखीमठ तक पहुंचने में करीब 100 किमी का अतिरिक्त सफर तय करना पड़ रहा है। यह मार्ग तकलीफदेह भी है। रुद्रप्रयाग से ऊखीमठ की दूरी लगभग 45 किमी है, लेकिन कुंड से ऊखीमठ तक आठ किमी मार्ग और पुलियों के जगह-जगह ध्वस्त होने से इस पर आवागमन शुरू नहीं हो पा रहा है।

खड़ी चढ़ाई पर चलना मुश्किल
कुंड से कुछ दूर संसारी से ऊखीमठ पहुंचने के लिए तीन किमी की खड़ी चढ़ाई चढ़नी पड़ रही है। रास्ते की हालत ऐसी है कि इस पर चलना भी मुश्किल बना हुआ है। ऊखीमठ निवासी पीपी नौटियाल बताते हैं कि यदि इस रास्ते पर घोडे़-खच्चर चलते, तो कुंड से आवश्यक सामग्री का ढुलान तो करते।

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