खोज का विषय है बादल फटने की घटना

Rudraprayag Updated Thu, 20 Sep 2012 12:00 PM IST
रुद्रप्रयाग। प्रदेश के प्रमुख वन संरक्षक (पीसीसीएफ) डा. आरबीएस रावत ने कहा कि ऊखीमठ के आपदा प्रभावितों की मदद के लिए विभाग प्रशासन को पूर्ण सहयोग देगा। शिविरों में जलौनी लकड़ी का प्रबंध निगम के माध्यम से किया जाएगा।
यहां आयोजित एक पत्रकार वार्ता में आपदा प्रभावित क्षेत्र गुप्तकाशी से सर्वेक्षण कर लौटे डा. रावत ने कहा कि बादल फटने जैसी घटनाओं का वैज्ञानिक दृष्टि से अध्ययन करना होगा। यह खोज का विषय है कि क्यों इनकी आवृत्ति बढ़ रही है। उन्होंने बताया कि एफआरआई ने निष्कर्ष निकाला है कि विश्व के औसत वन क्षेत्र से उत्तराखंड का वन क्षेत्र 20 फीसदी अधिक है। पिरुल से कोयला बनाने के लिए उत्तराखंड में 100 यूनिट लगाने का लक्ष्य है और पिरुल का कोयला खरीदने के लिए सेना को भी पत्र भेजा गया है। पीसीसीएफ ने बताया कि एफआरआई को कैंपा के माध्यम से अध्ययन के लिए प्रोजक्ट दिया गया है। इसमें यह देखा जाएगा कि पूर्व में पौधों के वेजीटेशन की क्या स्थिति थी और आने वाले 50 सालों में क्या होगी? इस रिपोर्ट के मुताबिक भविष्य की तैयारी की जाएगी। केदारनाथ में हवाई सेवाओं से पर्यावरण पर पड़ रहे प्रभावाें के बारे में उन्होंने कहा कि इस पर कार्रवाई चल रही है। बीआरओ को रोड कटिंग का मलबा पहाड़ियों में उड़ेलने के मामले में बीआरओ के डीजी को पत्र भेजा जा चुका है।

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