सामान ढोने के लिए भी नहीं मिल रहे मजदूर

Rudraprayag Updated Thu, 20 Sep 2012 12:00 PM IST
ऊखीमठ। आपदा प्रभावित क्षेत्र में मजदूरों की कमी से राहत कार्य भी प्रभावित होने लगे हैं। एक ओर जहां राहत सामग्री ढुलान नहीं हो पा रही है वहीं बंद रास्तों को खोलने के लिए मजदूर नहीं मिल पा रहे हैं। हालांकि जल विद्युत परियोजना का कार्य कर रही कंपनियां एलएंडटी और लैंकों के लगभग 100 मजदूर प्रशासन के काम में हाथ बंटा रहे हैं। लेकिन समस्या यह है अगर दोनों कंपनियां अपने मजदूर वापस बुला लेती हैं तो परेशानी खड़ी हो जाएगी।
बृहस्पतिवार रात की घटना में ऊखीमठ गैस गोदाम के निकट चार नेपाली मजदूरों की मौत हो गई थी, जिसमें ऊखीमठ में रह रहे अधिकांश नेपाली मजदूरों के परिवारों ने दहशत में क्षेत्र ही छोड़ दिया। ऐसे में यहां मजदूरों की कमी बनी हुई है। प्रभावित क्षेत्र की सबसे बड़ी समस्या यह है कि सड़क टूटने से संसारी से ऊखीमठ तक खड़ी चढ़ाई और संकरे रास्ते पर चलना पड़ रहा है। अश्व मार्ग भी न होने से मजदूर ही सामग्री ढुलान का विकल्प हैं, लेकिन नेपाली मजदूरों की कमी से पैदल मार्ग से ढुलान कार्य भी प्रभावित हो रहा है। जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी मीरा कैंतुरा ने बताया कि सरकारी निर्माणदायी संस्थाओं के मजदूर ऊखीमठ भेजे गए हैं।

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