त हमारी घर-कूंडी यन नी टूटदी..

Rudraprayag Updated Sun, 16 Sep 2012 12:00 PM IST
ऊखीमठ/रुद्रप्रयाग। ‘हे विधाता तू भी नी रैं हमतैं जरा सी जाग दे जांदी, त हमारी घर-कूंडी यन नी टूटदी..’ राजकीय इंटर कालेज ऊखीमठ में रह रहे प्रभावितों के नम आंखें और उदास चेहरे बाबा केदार से यही सवाल कर रहे हैं। बर्बादी की भेंट चढ़े आशियाने, अधूरे परिवार और दलदल हो चुके खेत-खलिहानों के सहारे आगे का जीवन कैसे कटेगा, क्या फिर अपना घर नसीब होगा। आपदा पीड़ितों को इस सवालों का जवाब खोजे नहीं मिल रहा है।
तबाही के बाद शुक्रवार की रात्रि उखीमठ एवं प्रभावित पांच गांवों की त्रासदी के बीच जिंदा लोगों के लिए कड़े इम्तिहान की रात थी। जीआईसी के शिविर में रह रहे प्रभावितों की आंखों से नींद गायब थी। अपनों को खोने का गम और मलबे में अब भी किसी अपने के जिंदा होने की उम्मीद के सहारे रातभर आंखें टकटकी लगाए रहीं। काली रात सदियों के समान लंबी हो रही थी। सब कुछ गंवाने के गम में बेचैनी रौंगटे खड़े कर रही थी और आंखों के समाने अपनों को खोने का मंजर अजगर की तरह बार-बार रेंग रहा था। बर्बादी का वीभत्स चेहरा यादकर जुबां खामोशी में भी फफक रही थी, तो कलेजा फ टा जा रहा था। बावजूद इसके, कुछ ने शवों के पास रहकर रात गुजारी, तो कुछ अपने बरबाद आशियाने छांने में जुटे रहे। शनिवार की सुबह ऊखीमठ में सूरज अटखेलियां करता हुआ निकला, तो बाबा केदार के लिए भी हाथ उठे। होंठ सिले थे, लेकिन अंतरात्मा कहर रह रही थी, लुट गए हैं, अपनों को भी खो दिया है। देवी-देवता पित्र-ईष्ट भी बैरी हो गए हैं। लेकिन आगे का जीवन कैसे कटेगा ? चारों तरफ फैली बर्बादी में कहीं अपना आशियाना फिर बन सकेगा, वो टूटे घर और दलदल खेत आबाद होंगे, ये सवाल प्रभावितों के उदास चेहरों पर साफ पढे़ जा रहे थे। आपदा में अपना घर और सगे-संबंधियों को खो चुके चुन्नी गांव निवासी इंद्रा देवी, शशि और राम सिंह का कहना था कि वे अभी तक रिश्तेदारों के यहां रह रहे हैं। लेकिन वहां कितने दिन तक रहेंगे, मकान टूटकर रहने लायक नहीं रह गए हैं। वहीं ब्राह्मण खोली निवासी अमर दीप, सर्वेश्वर प्रसाद सेमवाल, बच्चीराम सेमवाल, विजय मैठाणी, नरवेश्वर प्रसाद जमलोकी, गजपाल धर्मवांण कहते हैं कि आपदा के कहर से गांव बर्बाद हो गया है। एक तरफ गदेरा ऊफान पर है। जबकि दूसरी तरफ गहरी खाई बन रही हैं। रात और दिन लगातार बारिश हो रही है, जिससे डर बना हुआ है। भू-गर्भीय वैज्ञानिकों के द्वारा पूर्व में भी क्षेत्र को संवदेनीशील घोषित किया गया था। लेकिन प्रशासन ने इस पर गौर नहीं किया। इधर जिला प्रशासन का कहना है कि प्रभावितों को शीघ्र भारत सेवा आश्रम की धर्मशाला में शिफ्ट किया जाएगा।

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