बैठकें लेना एनजीओ के स्वयं निदेशक कोठारी की सनक

Rudraprayag Updated Sun, 19 Aug 2012 12:00 PM IST
अगस्त्यमुनि/रुद्रप्रयाग। अब तक जितनी जानकारी मिली है, उसके आधार पर यही कहा जा सकता है कि अधिकारियों को विश्वास में लेकर बैठकें लेना एक एनजीओ के निदेशक प्रवेश कोठारी की सनक है। उसकी इस सनक का शिकार पुलिस विभाग भी हो चुका है। टाई और सूट-बूट पहनकर लच्छेदार बात करने वाले प्रवेश की बातों में अधिकारी आसानी से आ जाते हैं। वह फोन पर ही बातें कर कार्यालयों से आदेश निर्गत कराने में माहिर है। हालांकि अभी उसके द्वारा रुपये ऐंठने की शिकायत नहीं आई है।
शुक्रवार को आशा कार्यकत्रियों की बैठक लेते हुए जब वह बड़ी-बड़ी बातें कर रहा था, तो कार्यकत्रियों को कुछ शक हुआ। उन्हाेंने अगस्त्यमुनि पुलिस से इसकी शिकायत की। जिस पर टिहरी निवासी प्रवेश कोठारी पकड़ा गया। वह स्वयं को एनजीओ क्यूपीडी वेलफेयर प्लान का निदेशक बताकर आशा कार्यकत्रियों को नियमित कराने का भरोसा दिला रहा था। इससे पूर्व वह घनसाली और जखोली में भी आशा कार्यकत्रियों की बैठक ले चुका है।
पुलिस की जांच में यह भी पता चला है कि उसने चमोली के पुलिस अधीक्षक को विश्वास में लेकर वह पुलिस कर्मियों की बैठकें भी ले चुका है। अगस्त्यमुनि में भी वह जलागम के गांवों में कार्यरत कर्मियों की भी बैठक ले चुका है। एनजीओ के स्वयंभू निदेशक को जमानती न मिलने पर जेल भेज दिया गया। चौकी प्रभारी नरेश राठौर ने बताया कि आरोपी का इतिहास देहरादून पुलिस द्वारा खंगाला जा रहा है।

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