चंद्र तेरा बलिदान, याद रखेगा हिंदुस्तान

Rudraprayag Updated Mon, 13 Aug 2012 12:00 PM IST
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रुद्रप्रयाग। चंद्र तेरा अमर बलिदान, याद रखेगा हिंदुस्तान जैसे नारों के साथ शहीद राइफलमैन चंद्र सिंह की अंतिम यात्रा निकाली गई। शहीद के गांव नगरासू (गगोठू) से घोलतीर के नीचे अलकनंदा नदी किनारे स्थित घाट पहुंचकर सैन्य सम्मान के साथ शहीद का अंतिम संस्कार किया गया। सैकड़ों लोगों ने नम आंखों से भारत मां के वीर सपूत को अंतिम विदाई दी।
ग्राम पंचायत नगरासू के गगोठू तोक के शिब्बी लाल और रामी देवी का 22 वर्षीय बेटा चंद्र सिंह बृहस्पतिवार को जम्मू-कश्मीर के गुरेज सेक्टर में घुसपैठ करने वाले पाकिस्तानियों के साथ मुठभेड़ में शहीद हो गया था। इन दिनों वह आरआर (राष्ट्रीय राइफल्स) में तैनात था।
रविवार सुबह तिरंगे में लिपटा चंद्र सिंह का शव जैसे उनके घर पहुंचा, उसके माता-पिता उससे लिपटकर रो पडे़। इसके बाद पुलिस और सेना के जवानों की अगुवाई में अंतिम यात्रा गांव से निकल पड़ी। गांव से घाट तक पांच किमी की यात्रा में सैकड़ों लोग शामिल हुए। शहीद के अंतिम संस्कार से पूर्व उन्हें पुष्पचक्र चढ़ाए गए। सेना के जवानों के तीन राउंड फायरिंग के साथ शहीद के भाइयों ने उसकी चिता को मुखाग्नि। पुलिस की ओर से घाट पर सीआर डिमरी मौजूद थे।

दुख नहीं मुझे फक्र है अपने भाई पर
चंद्र सिंह शुरू से ही करता था देशभक्ति की बातें
भाई सुरजीत का कहना, सभी को मिले ऐसा भाई
रुद्रप्रयाग। ऐसा भाई पाकर मुझे फक्र है। मुझे अपने अनुज की मौत का दुख नहीं है। वह एक नायक की भांति देश पर कुर्बान हो गया। मेरे भाई को जो सम्मान मिल रहा है, उसका सपना हर देशभक्त देखता है। वह शहीद होकर अमर हो गया। ये शब्द थे शहीद चंद्र सिंह के सबसे बडे़ भाई सुरजीत के। सुरजीत भी सेना में सूबेदार पद पर तैनात हैं और इन दिनों कांगो (अफ्रीका) में सेवा दे रहे हैं।
शहीद की अंतिम विदाई पर उसके भाइयों और साथियों के सीने गर्व से फूले हुए थे। शहीद के दो साथी भी चंद्र की बहादुरी से प्रभावित थे। इन दिनों छुट्टी आए लांस नायक आनंद (जसोली) और ताजबर सिंह (छिनका) यूनिट से चंद्र की शहादत की खबर सुन घाट पर पहुंचे थे। लांस नायक आनंद ने बताया कि चंद्र सिंह जबसे 10वीं गढ़वाल राइफल्स में आया था, तब से मैं उसे जानता हूं। वह हमेशा देशभक्ति की बातें करता था। वह अकसर दुश्मनों के हौसले पस्त करने के तरीके पूछता रहता था। हमने कई आपरेशन साथ भी किए। छह माह पूर्व चंद्र सिंह 10वीं गढ़वाल राइफल्स से 36 आरआर में गया था। शहीद के सीने में दुश्मनों की गोलियां लगी थी, इससे साफ दिख रहा था कि उसने कैसे दुश्मनों की गोलियां सीने में झेलते उनकी घुसपैठ की कोशिश नाकाम कर दी।

इंसेट
शहीद का प्रोफाइल
राइफलमैन चंद्र सिंह
वर्ष 2008 में सेना में भर्ती
वर्ष 2009 में 10वीं गढ़वाल में पोस्टिंग
वर्ष 2012 में 36राष्ट्रीय राइफल में पोस्टिंग।

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