गंगा उफान पर, ग्रामीणों क्षेत्रों में बढ़ा बाढ़ का खतरा

Dehradun Bureauदेहरादून ब्यूरो Updated Sat, 15 Aug 2020 01:24 AM IST
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ऋषिकेश ग्रामीण क्षेत्र में बाढ़ का कहर जारी, पॉलिटेक्निक के समीप हुआ कटाव ।
ऋषिकेश ग्रामीण क्षेत्र में बाढ़ का कहर जारी, पॉलिटेक्निक के समीप हुआ कटाव । - फोटो : RISHIKESH

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ऋषिकेश। राज्य के पर्वतीय जनपदों में हो रही भारी वर्षा के कारण ऋषिकेश के ग्रामीण क्षेत्र में नदियां उफान पर हैं। हालांकि केंद्रीय जल आयोग द्वारा दी जा रही जानकारी के अनुसार, ऋषिकेश शहरी क्षेत्र में नदी का जलस्तर पहले से कम हुआ है, लेकिन ग्रामीण क्षेत्र में स्थिति इसके विपरीत है। इसका प्रमुख कारण बैराज से अत्यधिक मात्रा में पानी छोड़ा जाना है।
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वीरभद्र स्थित बैराज से सुरक्षा के दृष्टिगत चैनल खोलकर पानी की निकासी लगतार जारी है। इससे वीरभद्र विस्थापित क्षेत्र के निचले हिस्से के अंतर्गत लक्कड़ घाट, खदरी के सीमांत क्षेत्र सहित गौहरीमाफी का गंगा लहरी क्षेत्र जलभराव के बाद अब कटाव की श्रेणी में आ गया है। ग्रामसभा खड़कमाफ के अंतर्गत निर्मित राजकीय पॉलीटेक्निक संस्थान गढ़ी श्यामपुर के निकट है। यहां हाल ही में हुए ऋषिकेश वन क्षेत्र के दस हेक्टेयर प्लांटेशन की सुरक्षा तारबाड़ के खंभे भू-कटाव के कारण नदी में गिरने लगे हैं। वन विभाग द्वारा कुछ माह पूर्व लगाया गया सुरक्षाबंध भी जलमग्न हो गया है। दूसरी ओर गंगा की बाढ़ से जलस्तर में हुई वृद्धि के कारण मां शकुंतला गोसेवा ट्रस्ट द्वारा गोशाला के समीप सेवला नाले पर बनाई गई पुलिया बह गई और निकासी के ह्यूम पाइपों में मलबा भर गया है। जिसे स्थानीय लोगों ने श्रमदान कर हटाया।
हाल ही में जिला गंगा सुरक्षा समिति में समिति के नामित सदस्य पर्यावरणविद विनोद जुगलान ने नदी के तट क्षेत्र से संबंधित मुद्दे उठाकर समस्याओं के निदान का आग्रह किया था। इसके बाद जिलाधिकारी डॉ आशीष श्रीवास्त के निर्देश पर सिंचाई विभाग की टीम ने वीरभद्र से लेकर सौंग नदी तक बाढ़ आशंकित क्षेत्र का निरीक्षण कर रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भेजी है। विनोद जुगलान का कहना है कि सिंचाई विभाग द्वारा गंगा की बाढ़ से होने वाले नुकसान को रोकने के लिए लक्कड़घाट के समीप तारजाल के पास ही यदि दो सौ मीटर का तटबंध बनाया जाए तो बरसात में नदी की अतिरिक्त जलधारा को ग्रामीण क्षेत्र में आने से रोका जा सकता है। इधर, उपजिलाधिकारी वरूण चौधरी का कहना है कि प्रशासन की टीम संभावित बाढ़ क्षेत्र में पूरी नजर बनाए हुए है। जो भी जरूरी एहतियात कदम उठाने की जरूरत होगी, उन पर तत्काल एक्शन लिया जाएगा।
2013 की आपदा में पॉलीटेक्निक पहुंचा था नुकसान
2013 में केदारनाथ आपदा से आई बाढ़ से राजकीय पॉलीटेक्निक की चारदीवारी मुख्य द्वार सहित पुलिया बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई थी। सौंग नदी में आई 1998 एवं 2014 की बाढ़ से खादर के खेतों में दर्जनभर से अधिक किसानों की भूमिधरी की भूमि सौंग नदी की भेंट चढ़ गई थी। लेकिन सिंचाई विभाग की ओर से बाढ़ सुरक्षा को प्रस्तावित योजना 6 वर्ष से केंद्र सरकार के मंत्रालयों में ही संस्तुति की बाट जो रही है, जबकि सौंग नदी की विकरालता को देखते हुए बाढ़ सुरक्षा प्रबंध को विधानसभा के सत्र में भी पास किया जा चुका है।
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