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मिसाइल, मोर्टार, बंदूक सब कुछ देखो यहां

ब्यूरो/अमर उजाला, पिथौरागढ़ Updated Sun, 14 Jan 2018 10:09 PM IST
पिथौरागढ़ में अपनी सेना को जानो कार्यक्रम में लोगों को दिखाने के लिए रखी गई तोप
पिथौरागढ़ में अपनी सेना को जानो कार्यक्रम में लोगों को दिखाने के लिए रखी गई तोप - फोटो : अमर उजाला
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भारतीय सेना की पंचशूल ब्रिगेड के दिशा-निर्देश पर यहां देवसिंह मैदान में रविवार से दो दिनी ‘अपनी सेना को जानो’ मेला शुरू हो गया है। सेना 14 जनवरी को वेटरन्स-डे मनाती है। इसी दिन फील्ड मार्शल केएम करिअप्पा भारतीय सेना से सेवानिवृत्त हुए। सोमवार को सेना दिवस मनाया जाएगा। वहीं, सेना ने आम लोगों को हथियारों के बारे में जानकारी देने के लिए खास आयोजन किया।
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इस मेले में 6 एमएम आर्टीलरी गन भी रखी गई है। इसे इंडियन फील्ड गन के नाम से भी जाना जाता है। 17 किलोमीटर की दूरी तक मार करने वाली इस गन को देखने के लिए लोग काफी उत्सुक रहे। इसके अलावा दो किलोमीटर दूरी तक मार करने वाली मिसाइल, पांच किलोमीटर तक मार करने वाली 81 एमएम मोर्टार के अलावा सेना द्वारा उपयोग में लाए जाने वाले सभी तरह के छोटे-बड़े हथियार आम लोगों के देखने के लिए रखे गए हैं।

मेले का उद्घाटन पंचशूल ब्रिगेड के कमांडर ब्रिगेडियर रंजन मलिक (सेना मेडल), विशिष्ट अतिथि जिलाधिकारी सी रविशंकर और रिटायर्ड कर्नल आनंद सिंह ने किया। इससे पहले युद्ध स्मारक पर वीर सैनिकों को श्रद्धांजलि दी गई। सोमवार को भी इसी तरह मेला चलेगा। आम जनता में सेना के प्रति जागरूकता बढ़ाने, राष्ट्रीय एकता, देशभक्ति की भावना को प्रगाढ़ करने तथा स्थानीय युवाओं को सेना के प्रति आकर्षित करने के लिए यह आयोजन किया गया है।

भारी संख्या में लोगों ने सेना की गतिविधियों और हथियारों के बारे में जानकारी हासिल की। इस दौरान वीरांगनाओं और पूर्व सैनिकों को सम्मानित किया गया। सेना ने हर स्टाल पर लोगों को जानकारी देने के लिए जानकार सैन्य अधिकारियों और जवानों को तैनात किया था। मेले में पुलिस अधीक्षक अजय जोशी, एसडीएम एसके पांडे समेत कई अधिकारी मौजूद थे। संचालन कैप्टन दीवान सिंह वल्दिया ने किया। इससे पहले सेना के जवानों ने बैंडवादन भी किया।

130 इंफैंट्री बटालियन ने औषधीय पौधों की जानकारी दी 
सेना की ओर से लगाए गए मेले के दौरान 130 इंफैंट्री बटालियन का स्टाल विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। इस स्टाल पर उच्च हिमालयी क्षेत्र में पाई जाने वाले कई औषधीय पौधों के नमूने रखे हैं। बटालियन के कमांडिंग आफीसर कर्नल के सरकार के निर्देशन में लगाए गए इस स्टाल पर तुलसी, लेमनग्रास, जंबू घास, काला बांज, पत्थरचट्टा, ऐलोबेरा, रतपतिया, अश्वगंधा, झिझरान, पारसली जैसे औषधीय पौधे उपलब्ध हैं। इसके अलावा स्थानीय फलों को भी स्टाल में रखा गया है। बटालियन ने जंगलों को आग से बचाने के लिए पर्चे भी बांटे। पर्चे में यह भी कहा गया है कि यदि कोई व्यक्ति जानबूझकर आग लगाते पकड़ा जाता है, उसके खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की जाएगी। दोषी पाए जाने पर ऐसे व्यक्ति को छह माह का कारावास और पांच हजार रुपये का जुर्माना हो सकता है। इस पर्चे में जंगलों में लगने वाली आग के दुष्परिणामों के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई है। डीएम सी रविशंकर ने सैन्य अधिकारियों के साथ स्टाल का निरीक्षण किया और इसकी तारीफ की।

ल्यूकोस्किन दवा में एक करोड़ की रॉयल्टी मिली
रक्षा जैव ऊर्जा अनुसंधान संस्थान (पंडा फार्म) की ओर से सेना मेले के दौरान लगाए गए स्टाल में कई उपयोगी दवाओं के नमूने रखे गए हैं। यह दवाएं संस्थान के वैज्ञानिकों ने खुद तैयार की हैं। इनमें सबसे महत्वपूर्ण ल्यूकोस्किन दवा है। यह दवा शरीर पर होने वाले सफेद दागों को मिटाने में कारगर साबित हुई है। एमिल फार्मासियूटिकल कंपनी ने इस दवा को अपने माध्यम से बांटा और रक्षा जैव ऊर्जा अनुसंधान संस्थान को अब तक एक करोड़ पांच लाख रुपये की रॉयल्टी दे दी है। अब इस दवा को पतंजलि योगपीठ के माध्यम से बांटने की तैयारी चल रही है। संस्थान के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. हेमंत कुमार पांडे ने बताया कि अब तक इस दवा से 25 हजार लोगों के सफेद दाग गायब हो चुके हैं। इसके अलावा इस स्टाल में हर्बोकेयर, एंटी टूथेच, एंटी एक्जीमा जैसी दवाएं भी रखी गई हैं। संस्थान के वैज्ञानिकों ने सिर्फ पानी की मदद से तैयार टमाटर के पौधे को भी स्टाल में रखा है। इसमें मिट्टी का उपयोग नहीं होता। इस विधि से सब्जी उत्पादन को हाइड्रोपोनिक्स कहा जाता है। इसी तरह हाइड्रोफोडर भी रखा गया है। इसमें भी मिट्टी की जरूरत नहीं होती। इसके अलावा विदेशी सब्जियों को भी स्टाल में रखा गया है। स्टाल के संचालन में डॉ. वंदना पांडे, डॉ. उमेश सिंह, डॉ. एसके जोशी समेत अन्य कर्मचारी सहयोग दे रहे हैं। इस स्टाल में भी लोगों की भारी भीड़ है। रक्षा जैव ऊर्जा अनुसंधान संस्थान रक्षा अनुसंधान विकास संगठन (डीआरडीओ) के अधीन काम करता है।

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