कालापानी पहुंचा कैलाश यात्रियों का पहला दल

ब्यूरो/ अमर उजाला , पिथौरागढ़/धारचूला। Updated Tue, 18 Jun 2019 10:18 PM IST
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धारचूला से बूंदी को रवाना होते कैलाश यात्री।
धारचूला से बूंदी को रवाना होते कैलाश यात्री। - फोटो : पिथौरागढ़

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कैलाश मानसरोवर यात्रा के पहले दल के यात्री कालापानी पहुंच गए हैं। यात्री बुधवार को नाभीढांग को रवाना होंगे।
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आईटीबीपी मिर्थी कंट्रोल रूम से मिली जानकारी के अनुसार सोमवार शाम दल में शामिल 58 यात्रियों का गुंजी में चिकित्सकीय जांच की गई। सभी यात्री स्वस्थ पाए गए। पहले दल में 49 पुरुष और नौ महिलाएं शामिल हैं। यात्री गुंजी से सुबह आईटीबीपी के चिकित्सक डॉ. राहुल रावत, महिला कमांडो दस्ता, मेडिकल, संचार टीम के साथ 7.50 बजे रवाना हुए और नौ किमी की पैदल यात्रा के बाद 10.45 बजे कालापानी पहुंचे। उच्च हिमालयी क्षेत्र में मौसम लगातार करवट बदल रहा है। बारिश के साथ ही हिमपात भी हो रहा है।
कालापानी के बाद अगले पड़ाव नाभीढांग में सुबह तीन सेमी तक बर्फबारी हुई है। लिपुपास में पहले से ही काफी बर्फ जमा है। क्षेत्र में ताजा हिमपात होने से यात्रियों को दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। इधर दूसरे दल के 45 यात्री मंगलवार को धारचूला आधार शिविर से सुबह छह बजे वाहनों से नजंग को रवाना हुए। यात्राधिकारी दिवान सिंह बिष्ट और मनीष मेहरा ने बताया कि दल में 37 पुरुष और आठ महिलाएं शामिल हैं। यात्री नजंग से 14 किमी की दूरी तय कर बूंदी में विश्राम करेंगे।
10वीं बार यात्रा पर जा रहे हैं हरियाणा के जोगिंदर
धारचूला। हरियाणा के जोगिंदर खत्री (50) 10वीं बार कैलाश मानसरोवर की यात्रा पर जा रहे हैं। वहीं के उनके दोस्त विजेंद्र त्यागी (45) चौथी बार भगवान भोलेनाथ की नगरी के दर्शन को जा रहे हैं। दोनों दोस्तों का कहना है कि भोलेनाथ की कृपा से उनको बार-बार यात्रा पर जाने का सौभाग्य मिल रहा है। उनका कहना है कि नजंग से बूंदी तक के पैदल मार्ग सुधार किया जाना चाहिए। हरियाणा के ही सुंदर शर्मा (43) दसवीं बार यात्रा पर हैं। उनका कहना है कि कैलाश दर्शन को बार-बार जाने के बाद भी मन नहीं भरता है।

16वीं बार कैलाश की यात्रा पर देवेंद्र
धारचूला। दिल्ली निवासी देवेंद्र कुमार मुद्गल (57) 16वीं बार कैलाश दर्शन को जा रहे हैं। वे 12 बार भारत से और चार बार नेपाल से यात्रा कर चुके हैं। उनका कहना है कि भोलेनाथ की नगरी के दर्शन से आत्मिक शांति का अनुभव होता है। जब तक भोलेनाथ का बुलावा आएगा तब तक दर्शन को जाते रहेंगे। ब्यूरो  
 
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