सरकार पीठ भले ही थपथपा ले, हकीकत है कुछ और

Pithoragarh Updated Sun, 24 Nov 2013 05:45 AM IST
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मदकोट (पिथौरागढ़)। आपदा को पांच महीने बीत गए हैं। बहुगुणा सरकार आपदा राहत के काम पुख्ता करने को लेकर अपनी पीठ थपथपा रही है, हकीकत में ऐसा है नहीं। जून के जलप्रलय में आधा मदकोट कस्बा गोरी नदी में समा गया था। मदकोट बाजार से गुजरने वाली मेन सड़क भी बह गई थी। स्थिति यह है कि आधा बाजार इधर, तो आधा बाजार उधर रह गया है। मकान गिरने के कगार पर हैं। बाजार को आपस में जोड़ने के लिए रास्ता बनाए जाने की जरूरत है लेकिन यह काम भी पांच माह बाद भी नहीं हुआ है।
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16, 17 जून की तबाही में मुनस्यारी तहसील का मदकोट कस्बा तबाह हो गया था। एक दर्जन से अधिक भवन गोरी नदी में समा गए थे। मदकोट को मुनस्यारी और जौलजीबी से जोड़ने वाली सड़क बाढ़ में बह गई। बाजार के बीचोंबीच स्थित सड़क बहने से बाजार ही दो हिस्सों में बंट गया। मदकोट में अब भी दर्जनों मकान बहने की कगार पर हैं। अगली बरसात से पहले बाढ़ नियंत्रण के उपाय नहीं किए गए तो यह मकान भी अगली बरसात के बाद बच पाएंगे, ऐसा संभव नहीं है।
बीआरओ ने मुनस्यारी को जोड़ने के लिए वैकल्पिक सड़क बनाई है लेकिन बाजार को आपस में जोड़ने के कोई उपाय नहीं किए गए हैं। लोग जान जोखिम में डालकर क्षतिग्रस्त हिस्से से ही आवाजाही कर रहे हैं। वैकल्पिक सड़क के जरिए लोग बाजार के दूसरे हिस्से में जाएं तो तीन सौ मीटर की दूरी तय करनी पड़ रही है। महिला मंगल दल की अध्यक्ष हीरा मर्तोलिया कहती हैं कि रास्ता न बनने के साथ ही बाढ़ नियंत्रण का काम न होना जानमाल से खिलवाड़ है।
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