कुण में भात और भड्डू में दाल अब नहीं बनता

Pithoragarh Updated Fri, 22 Nov 2013 05:45 AM IST
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पिथौरागढ़। विवाह के दिन तांबे के बड़े तौले (कुण) में पकने वाला भात और भड्डू (कांसे का पात्र) में तैयार होने वाली दाल का स्वाद गायब हो गया है। बाराती तथा घराती पंक्ति (लौर) में बैठकर भोजन करते थे। अब तो बारातघरों में शादी होती है। बारातघर का कारीगर खाना बनाते हैं। मेज में खाना सजता है। पंक्ति में कोई नहीं बैठता। स्टेंडिंग में खाना खाते हैं। बदलाव विवाह की परंपराओं के साथ साथ भोजन में भी हुआ है।
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पहले पहाड़ अभावग्रस्त थे। यहां सामान नहीं मिल पाता था। लोग गरीबी में जीवनयापन करते थे। तब यदि किसी के यहां विवाह कार्यक्रम हो जाए तो घर की ही दाल, सब्जी, घी का ही प्रयोग होता था। लोग कद्दू को सुखाकर रखते थे। उड़द की दाल का ज्यादा महत्व होता था। 80 के दशक के बाद परिवर्तन तेजी से आया। धीरे धीरे बारातघरों में शादी का प्रचलन बढ़ा। गांवों में अब बारात के दिन पनीर की सब्जी, पुलाव जरूर बनाया जाता है। बारातियों के नाश्ते में अब पूरी, रोटी नहीं बनती। उसके स्थान पर छोले, भटूरे बनने लगे हैं। बाजार की सब्जियां प्रयोग होती हैं। बड़े तौले तथा भड्डू की जगह प्रेशर कुकर ने ले ली। ग्राम पंचायतों ने थाली, बर्तनों के सेट रख लिए हैं। विवाह के समय पुरानी परंपराएं जिस तेजी से अलग हुई, उसी तेजी से खानपान भी बदला है।
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