इन हालातों में कैसे बने राज्य शिक्षा का हब

Pithoragarh Updated Wed, 12 Dec 2012 05:30 AM IST
पिथौरागढ़। सरकार राज्य को शिक्षा का हब बनाने का ढोल पीटती है लेकिन सूबे के हालात ऐसे नहीं हैं कि सरकार का यह सपना पूरा हो सके। शिक्षकों की कमी के चलते सरकारी स्कूल केवल खानापूर्ति का साधन बन गए हैं। ग्रामीण इलाके के सरकारी स्कूल इस समस्या से अधिक जूझ रहे हैं। भाजपा शासनकाल में उच्चीकृत हाईस्कूल और इंटर कॉलेजों में सरकार ने अब तक पद सृजित नहीं किए गए हैं। शिक्षामित्रों की हड़ताल ने कंगाली में आटा गीला वाले हालात पैदा कर दिए हैं। हड़ताल के चलते जिले के 50 प्राथमिक स्कूलों में ताले लटक गए हैं।
अधिकांश सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी है। ऐसा कोई ही महीना होगा जब स्कूलों में शिक्षकों की तैनाती की मांग को लेकर अभिभावक शिक्षा विभाग के दफ्तर के चक्कर न काटते हों और आंदोलन न होते हों लेकिन इस सब का सरकार और शिक्षा महकमे पर कोई फर्क नहीं पड़ रहा है। अधिकारी रटा रटाया जवाब देते हैं कि शिक्षकों की नियुक्ति होगी तो स्कूलों में तैनाती कर दी जाएगी।
भाजपा शासनकाल 2011 में जिले में 39 हाईस्कूल और इंटर कालेज खोले गए लेकिन इन स्कूलों में शिक्षक और अन्य स्टाफ के पद ही सृजित नहीं किए गए। शासन की ओर से पूर्व में तैनात स्टाफ से ही उच्चीकृत स्कूलों को संचालित करने का फरमान सुना दिया गया। आज भी यह स्कूल शिक्षकों की बाट जोह रहे हैं। शिक्षकों की कमी से लोग सरकारी स्कूलों से कन्नी काटने लगे हैं। जिसका असर सरकारी स्कूलों की छात्र संख्या पर पड़ रहा है।

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