निरीह जानवरों के मसीहा बने किशन चंद

Pithoragarh Updated Wed, 12 Dec 2012 05:30 AM IST
पिथौरागढ़। प्रदेश में गायों के संरक्षण के नाम पर गौ रक्षा कानून बनाया गया है लेकिन नगर में लावारिस घूमने वाली गायों के लिए किसी भी प्रकार की सरकारी मदद नहीं मिल रही है। बावजूद इसके कुछ लोग आज भी नि:स्वार्थ भाव से इन गायों की मदद को आगे रहते हैं।
इस शहर में सामाजिक कार्यकर्ता किशन चंद इन निरीह जानवरों के लिए किसी मसीहा से कम नहीं हैं। गायों को मुसीबत में देखकर किशन चंद अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंच जाते हैं। नगर के टकाना क्षेत्र में पिछले दस दिनों से घायल एक गाय की जान उन्हीं के प्रयास से बच सकी है। किशन चंद और जिला चिकित्सालय के फार्मसिस्ट प्रमोद जोशी, लक्ष्मण सिंह बीते दस दिनों से इस गाय की सेवा कर रहे हैं। किशन चंद ने बताया कि जब उन्होंने इस गाय को देखा तो इसके दोनों सींग उखड़े हुए थे। गाय के शरीर पर गहरी चोटें थीं। शरीर में कीड़े पड़ने से पूरे शरीर से दुर्गंध आ रही थी लेकिन लगातार मिले इलाज के बाद अब गाय की हालत में काफी सुधार हो रहा है।
उन्होंने बताया कि नगर में घूमने वाली गायें एक स्थान पर नहीं रहतीं इसलिए इलाज के दौरान उन्हें तलाशने में काफी दिक्कत आती है। उनका कहना है कि अगर सरकार इन जानवरोें के लिए गौशाला नहीं बना सकती तो कम से कम टिन शेड की व्यवस्था तो कर ही सकती है। चंद ने इस मसले पर कई बार राज्य सरकार और स्थानीय जनप्रतिनिधियों को भी ज्ञापन भेजा है।

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