प्रवास की ओर निकलने लगे भेड़ पालक

Pithoragarh Updated Tue, 04 Dec 2012 05:30 AM IST
थल। मात्र तीन महीने ही अपने मूल निवास स्थान पर रहने वाले भेड़ पालक जाड़ों में एक बार फिर तराई की ओर कूच करने लगे हैं। अब जाड़ों भर यह लोग तराई में रहेंगे।
प्रवास में थल पहुंचे मल्ला दुम्मर के राजेंद्र बृजवाल 100 भेडें, साईपोलो के जीवन सिंह लस्पाल 50 भेड़ें और फाफा (गोरीपार) के पान सिंह लुंतड़ी 100 भेड़ों के साथ टनकपुर जा रहे हैं। बताते हैं कि यह लोग अप्रैल से जुलाई तक हुणदेश के बुग्याल में अपने जानवरों के साथ रहते हैं। अगस्त में पुन: प्रवास की ओर निकल पड़ते हैं। फिर अप्रैल में अपने मूल स्थान को लौट आते हैं। बताते हैं कि इस बार भी यह लोग अगस्त में हुणदेश से तराई प्रवास के लिए निकल गए थे। तमाम पड़ावों को पार करने के बाद अब थल पहुंचे हैं। बताते हैं कि टनकपुर तक जाने के लिए यह लोग थल, बेरीनाग, गंगोलीहाट, घाट, लोहाघाट वाले रास्ते का इस्तेमाल करते हैं। टनकपुर जाने तक कुल 38 पड़ावों में ठहरते हैं। भेड़ों की सुरक्षा और उन्हें तकलीफ से दूर रखने के लिए एक ही पड़ाव पर कई दिनों तक ठहरते हैं।
कहते हैं कि राशन साथ में रहता है। यदि बहुत जरूरी नहीं हुआ तो प्रवास के दौरान भेड़ों को बेचते नहीं हैं। बताते हैं कि जंगलों में रहने के दौरान तमाम खतरे उठाने पड़ते हैं। भेड़ों के बीमार होने पर चिकित्सकीय मदद लेने में सबसे अधिक दिक्कत आती है।

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