पानी को तरस रहे रहे कोटापंद्रहपाला के लोग

Pithoragarh Updated Thu, 11 Oct 2012 12:00 PM IST
नाचनी। कोटापंद्रहपाला क्षेत्र की दो हजार से अधिक की आबादी पिछले तीन महीने से पेयजल किल्लत से जूझ रही है। पेयजल की कमी का असर जीआईसी धनार के मध्यान्ह भोजन योजना (एमडीएम) पर भी पड़ रहा है। साथ ही लोगों को मीलों दूर से पानी ढोकर लाना पड़ रहा है। ग्रामीणों में पेयजल महकमे के खिलाफ रोष है।
मलौनी ग्राम प्रधान गोविंदी दानू, क्षेत्र पंचायत सदस्य गोविंद पंवार, शांति देवी, कुसमा देवी का कहना है कि 18 जुलाई को अतिवृष्टि के कारण क्षेत्र की चिफलुवा से कमटाचूरा, मलौन, खड़िग, धनार, बजेता, तांगरपानी, राया, थाम आदि गांवों के लिए बनी पेयजल योजनाएं बुरी तरह से ध्वस्त हो गई। इसके बाद से क्षेत्र में पेयजल को लेकर हाहाकार मचा हुआ है। लंबे समय से बारिश नहीं होने से क्षेत्र के प्राकृतिक जल स्रोत सूखने लगे हैं। पानी न होने से यहां रहने वाली दो हजार की आबादी को तीन किलोमीटर नीचे बहने वाली भुजगड़ नदी से पानी ढोकर लाना पड़ रहा है। जिससे ग्रामीणों के समय की बर्बादी हो रही है।
पंद्रहपाला क्षेत्र में जीआईसी धनार में 400 बच्चे पढ़ते हैं। लेकिन पानी नहीं होने से मध्यान्ह भोजन प्रभावित हो रहा है। उन्होंने शीघ्र इस समस्या का समाधान नहीं होने पर नाचनी के पास चक्काजाम लगाने की चेतावनी दी है।

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