युद्ध लड़े सैनिकों के साथ नाइंसाफी : ले. कर्नल गुलेरिया

Pithoragarh Updated Mon, 01 Oct 2012 12:00 PM IST
पिथौरागढ़। पूर्व फौजियों के साथ अपनाए जा रहे दोयम रवैये से राष्ट्रीय सैनिक संस्था गुस्से में है। सैनिक संस्था के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष लेफ्टिनेंट कर्नल (रिटायर्ड) सत्यपाल सिंह गुलेरिया का कहना है कि केंद्र सरकार के इस रवैये से वर्ष 2006 से पूर्व सेवानिवृत्त हुए देश के कई लाख पूर्व फौजियों को भारी आर्थिक नुकसान होगा। संस्था ने सरकार के इस फैसले को पूर्व फौजियों के मनोबल को गिराने वाला बताया है। कहा कि जिन फौजियों ने देश के लिए 1962 में चीन और 1965 एवं 1971 में पाकिस्तान के खिलाफ युद्ध लड़ा उन्हें कम पेंशन देना सरासर नाइंसाफी है। साथ ही संविधान प्रदत्त समानता के हक के भी खिलाफ है।
राष्ट्रीय सैनिक संस्था समेत कई संगठन एक रेंक-एक पेंशन की लड़ाई वर्षो से लड़ते रहे। ले. कर्नल गुलेरिया का कहना है कि पेंशन में विसंगति से वर्षों पूर्व रिटायर हुए फौजियों को भारी नुकसान हो रहा है। लंबी लड़ाई के बाद एक रेंक-एक पेंशन का प्रावधान तो किया गया मगर इस निर्णय का लाभ 2006 से पूर्व सेवानिवृत्त हुए फौजियों को नहीं दिया जा रहा है। उनका कहना है कि इस फैसले से देश के तकरीबन 95 लाख पूर्व फौजियों को आर्थिक नुकसान होगा। इस वक्त फौज में जवान की पेंशन में ही 1500 से 2700 रुपये तक का अंतर है, जबकि जूनियर कमीशंड आफिसर में ये अंतर 3500 से 4500 और अधिकारी वर्ग में 4500 से 7000 रुपये तक है।
सैनिक संस्था के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष का कहना है कि संगठन न्याय की इस लड़ाई को तेज करेगा। इसे लेकर संगठन ने केंद्र सरकार में शामिल उत्तराखंड के अकेले मंत्री हरीश रावत को ज्ञापन भी भेजा गया है।

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