जवाबदेही से बचना है मूर्ति को कांसे की बताना

Pithoragarh Updated Sat, 25 Aug 2012 12:00 PM IST
बेरीनाग। पाताल भुवनेश्वर के चंडिका मंदिर से चुराई गई महिषासुर मर्दिनी की मूर्ति को कांसे की बताए जाने पर स्थानीय लोगों ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। स्थानीय लोगों का कहना है कि पुरातत्व विभाग से जुड़े लोग मूर्तियों की सुरक्षा की जिम्मेदारी का मसला उठने के बाद अब अपना पल्ला झाड़ने के लिए इस तरह की बातें कह रहे हैं। हकीकत में सदियों से इस मूर्ति को अष्टधातु की बताया गया है। मूर्ति गायब होने के बाद बिना किसी प्रमाण के इसे कांस्य की बताना जवाबदेही से बचना है।
पाताल भुवनेश्वर मंदिर कमेटी के अध्यक्ष नीलम भंडारी ने कहा है कि इस मूर्ति को परंपरागत रूप से अष्टधातु की माना गया है। वृद्ध भुवनेश्वर मंदिर में रखी अन्य तमाम मूर्तियों में मात्र इसी मूर्ति की प्रतिदिन नियमित रूप से पूजा होती थी। मंदिर कमेटी के प्रधान पुजारी उमेद भंडारी कहते हैं कि बिना परीक्षण और ठोस साक्ष्य के मूर्ति को कांसे की बताना उचित नहीं है। अगर मूर्ति वास्तव में कांसे की थी तो इस बात को पहले ही सार्वजनिक करना चाहिए था। शायद ऐसा होने से धार्मिक मान्यताओं की इस मूर्ति पर चोरों की कुदृष्टि पड़ने से बच जाती। ग्राम प्रधान गोपुली देवी ने कहा है कि मूर्ति चाहे किसी भी धातु की हो उसे जल्दी बरामद करने की कोशिश की जानी चाहिए।

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