राहत और पुनर्वास कानून बनाया जाए

Pithoragarh Updated Mon, 20 Aug 2012 12:00 PM IST
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धारचूला। भारत की कम्यूनिस्ट पार्टी (माले) ने आपदाग्रस्त क्षेत्रों का दौरा शुरू कर दिया है। पार्टी ने भेती और झिमरगांव के 21 परिवारों को तीन वर्ष बाद भी सुरक्षित स्थानों पर नहीं बसाए जाने पर रोष व्यक्त किया है। माले ने आपदा के मामले में राजनीति करने की जगह राहत एवं पुनर्वास कानून बनाने की मांग की है।
भाकपा माले के जिला सचिव जगत मर्तोलिया, नंदा बिष्ट, भागा बिष्ट और दलीप सिंह के नेतृत्व में झिमरगांव का दौरा करने के बाद धारचूला लौटी टीम ने रिपोर्ट जारी करते हुए बताया कि भेती में चार परिवारों की 40 नाली भूमि तथा भवन आपदा की भेंट चढ़ गए हैं। इन चार परिवारों में आन सिंह को अभी तक मुआवजा नहीं मिल पाया है। इन परिवारों को अन्यत्र बसाने की कवायद भी शुरू नहीं हो पाई है। मल्ला भेती गांव में आपदा ने पेयजल लाइन को ध्वस्त कर दिया है इसकी वजह से यहां रहने वाले पांच परिवारों ने स्वयं भेती नाले से रबर की पाइप लगाकर पानी की व्यवस्था की है। तल्ला भेती के आपदा से उजड़ चुके चार परिवारों के 31 सदस्यों का ठिकाना अब कहां होगा प्रशासन यह तय नहीं कर पाया है।
2009 की आपदा में संतोष सिंह और रतन सिंह का मकान क्षतिग्रस्त हो गया था, जिन्हें आज तक मदद नहीं मिल पाई है। इस गांव में चारों ओर से लगातार भूस्खलन हो रहा है। इसकी वजह से यहां रहने वाले परिवार मौत के मुहाने पर खड़े हैं। पार्टी ने इस गांव में रहने वाले लोगों को तत्काल अन्यत्र बसाने की मांग की है।

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