वजूद को जूझ रही हैं ये देवियां

Pithoragarh Updated Thu, 26 Jul 2012 12:00 PM IST
पिथौरागढ़। हमारी संस्कृति में बालिकाओं को देवी का अवतार माना जाता है। हर साल दो बार नवरात्र में उनका देवी रूप में पूजन भी होता है। लेकिन उनकी असल स्थिति क्या वास्तव में इतनी ही श्रद्धेय भी है? उत्तर नकारात्मक है। इतना ही नहीं बालिकाओं का कम होता अनुपात गंभीर चेतावनी भी है। बीते दो दशक में 15.76 प्रतिशत बालिकाएं कम हो गई हैं।
सीमावर्ती पहाड़ी जिले पिथौरागढ़ में लिंग परीक्षण का एक भी मामला अब तक पकड़ में नहीं आया है। मगर यहां शिशु जन्म दर में बालक-बालिकाओं के अनुपात में बीते दो दशक में जबर्दस्त अंतर आया है। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़े बताते हैं कि लड़कों की अपेक्षा लड़कियों की जन्म दर गिर रही है। दो दशक में 15.76 प्रतिशत बालिकाएं कम हुई हैं। पिछले साल हुई जनगणना में छह वर्ष के बच्चों में प्रति एक हजार 812 बालिकाएं हैं। जबकि 2001 में ये आंकड़ा 902 और 2011 में ये आंकड़ा 964 था।
जिला समन्वयक एमपी मौर्या के मुताबिक जिले में छह वर्ष तक की आयु के 62911 बच्चों में मात्र 28192 बालिकाएं हैं। ये हाल तब है, जब जिले की कुल 485993 आबादी में महिलाओं की संख्या अधिक है।
तो आखिर ऐसा क्या हुआ कि बालिकाएं घट रही हैं? स्वास्थ्य विभाग अल्ट्रासाउंड केंद्रों के बढ़ने एवं आबादी में इस बदलाव के बावजूद भ्रूण हत्या को नकारता है। इस वक्त जिले में सरकारी एवं प्राइवेट 19 अल्ट्रासाउंड केंद्र हैं। मुख्य चिकित्साधिकारी डा.एससी पंत का कहना है कि कन्या भ्रूण हत्या को रोकने के लिए विभाग छापामार अभियान चलाता रहता है। लेकिन सच यह भी है कि विभाग अभी तक भ्रूण हत्या का कोई मामला उजागर नहीं कर सका है।

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