बालिका शिक्षा के प्रति गंभीर नहीं उत्तराखंड सरकार

Pithoragarh Updated Tue, 17 Jul 2012 12:00 PM IST
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थल (पिथौरागढ़)। बालिका शिक्षा को लेकर देशभर में खूब हल्ला काटा जाता है। केंद्र सरकार बालिका शिक्षा पर करोड़ों रुपये खर्च कर योजनाओं का संचालन करती है, लेकिन अपने सूबे की सरकार और शिक्षा महकमा बालिका शिक्षा के प्रति गंभीर नहीं है। राजकीय बालिका इंटर कालेज थल में शिक्षकों की कमी के कारण विज्ञान वर्ग की कक्षाएं संचालित नहीं हो पा रही हैं। 78 लाख रुपये की लागत से बनाया गया स्कूल का भवन और विज्ञान लैब का छात्राओं को कोई लाभ नहीं मिल पा रहा है। महकमा जीजीआईसी को एक अदद प्रधानाचार्य तक देने में नाकाम साबित हुआ है।
2005 में थल राजकीय बालिका हाईस्कूल को शासन ने इंटर का दर्जा दिया। स्कूल भवन और विज्ञान लैब के लिए शासन ने धन अवमुक्त किया। 2010 में विज्ञान लैब और मुख्य भवन तैयार हुआ। लोगों को आस थी कि अब सुविधाएं उपलब्ध होने के बाद शिक्षिकाओं के रिक्त पदों पर नियुक्ति होगी। बालिकाएं घर के नजदीक इंटर तक की पढ़ाई करेंगी। परंतु पटरी से उतरी व्यवस्था ने सब चौपट करके रख दिया। हालात यह हैं विज्ञान वर्ग की कक्षाएं शुरू नहीं हो पा रही हैं।
सरकारी कन्या इंटर कालेज में भौतिक विज्ञान, जीव विज्ञान, गणित, अंग्रेजी के शिक्षिकाओं के पद इंटर का दर्जा मिलने के बाद से खाली हैं। एलटी में गणित, विज्ञान, सामाजिक विज्ञान के शिक्षक नहीं हैं। प्रधानाचार्य के साथ ही लिपिक का पद 2011 से खाली है। प्रवर सहायक 2010 से नहीं है। स्कूल की रखवाली के लिए रात्रिकालीन चौकीदार 1998 से नहीं है। इन हालात में लड़का-लड़की एक समान सबको दो शिक्षा का दान सरकार का नारा कैसे साकार होगा यह तो सरकार और सरकारी कारिंदे ही बता सकते हैं।
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