छोटा कैलास यात्रा से भी ख्याति पा रहा पिथौरागढ़

Pithoragarh Updated Mon, 16 Jul 2012 12:00 PM IST
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धारचूला/पिथौरागढ़। कैलास मानसरोवर यात्रा ही नहीं अब पिथौरागढ़ की कैलास यात्रा (छोटा कैलास) को लेकर भी सीमांत जिला ख्याति पा रहा है। छोटा कैलास पुरातन काल से ही धार्मिक आस्था का केंद्र रहा है। मान्यता है कि कैलास निवास से पहले भगवान शंकर छोटा कैलास में ही निवास करते थे। छोटा कैलास में मानसरोवर की तरह ही पार्वती नामक सरोवर है। अंग्रेजी शासन काल में छोटा कैलास के लिए पैदल मार्ग बनाने में पठानों की मदद ली गई थी, जिसके प्रमाण आज भी मौजूद हैं। 1998 से हर साल एक जून से कुमाऊं मंडल विकास निगम छोटा कैलास यात्रा का संचालन करता है। हर साल भारी संख्या में देशभर के आस्थावान लोग छोटा कैलाश के दर्शनों को पहुंच रहे हैं। श्रावण मास में छोटा कैलास दर्शन का विशेष महत्व बताया जाता है।
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मान्यता है कि छोटा कैलास की खोज अनादि काल में साधु-संतों ने की थी। जब लोग सशरीर छोटा कैलास पहुंचने लगे भगवान शंकर छोटा कैलास को छोड़कर कैलास मानसरोवर में प्रवास करने लगे। जाते-जाते भगवान शिव अपनी शक्ति से छोटा कैलास में सरोवर का निर्माण कर गए। छोटा कैलास पर्वत, कैलास पर्वत के ही समान दिखता है तो पार्वती सरोवर भी मानसरोवर झील सरीखी है।
पुरातन तकाल से छोटा कैलास का अग्रणी स्थान रहा है। अंग्रेजी काल में भी इस शिव धाम को विशेष महत्व दिया गया। बुजुर्ग बताते हैं कि तब यात्रियों को लखनपुर, छर्पा नामक स्थान पर कठोर चट्टानों के कारण भारी मुसीबतों का सामना करना पड़ता था। तमाम यात्री चट्टान से फिसलकर काली नदी में समा जाते थे। तब अंग्रेजी शासन ने चट्टान काटने में माहिर पठानों की टीम लखनपुर भेजी। पठानों ने लखनपुर से बिंदाकोटी तक चट्टान काटकर पैदल चलने लायक रास्ता बनाया। पठानों के लखनपुर आने के प्रमाण आज भी मौजूद हैं। जिस स्थान पर पठानों ने डेरा डाला था, उस स्थान को खान डेरा के नाम से जाना जाता है।
छोटा कैलास को आदि कैलास यानि कि मूल कैलास के नाम से भी जाना जाता है। इस प्राचीन यात्रा की खास बात यह है कि छोटा कैलास के साथ ही विश्व विख्यात ऊँ पर्वत, नारायण आश्रम, महर्षि व्यास की तपस्थली व्यास गुफा, पांडवों की मां कुंती की शरणस्थली कुटी और छियालेख में स्थित फूलों की घाटी के दीदार करने का मौका दर्शनार्थियों को मिलता है। चीन सीमा के पास होने के कारण यात्रा पर जाने के लिए धारचूला प्रशासन से छियालेख इनर लाइन का परमिट लेना पड़ता है। श्रावण मास में कई बार छोटा कैलास की यात्रा कर चुके देव डांगर राम सिंह कुटियाल (60) और आनंद सिंह गर्व्याल (61) बताते हैं कि श्रावण शुक्ल पक्ष की संक्रांति से पूर्णमासी तक छोटा कैलास में भगवान शंकर के साथ ही समस्त देवताओं का वास होने की मान्यता है। इसका आभास भी वहां होता है। केएमवीएन के यात्राधिकारी बची राम आर्या ने बताया कि इस साल अब तक आठ बैचों के 163 यात्री आदि कैलास के दर्शन कर चुके हैं। लोग प्राइवेट एजेंसी के सहयोग के साथ ही निजी तौर भी आदि कैलास की यात्रा करते हैं। कैलास यात्रा की तुलना में इस यात्रा में काफी कम खर्च आता है।
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