निजी सेक्टर से वित्तपोषित हैं इंजीनियरिंग कालेज

Pithoragarh Updated Tue, 05 Jun 2012 12:00 PM IST
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पिथौरागढ़। सीमांत इंस्टीट्यूट और टेक्नोलाजी सरकारी इंजीनियरिंग कालेज न होकर निजी सेक्टर द्वारा वित्त पोषित है। इसका खुलासा सोमवार को विधानसभा में पिथौरागढ़ के विधायक मयूख महर द्वारा उठाए गए प्रश्न के जवाब में हुआ है। सरकार ने इस कालेज से बीटेक कर रहे छात्र, छात्राओं को फीस में से बीस-बीस हजार रुपये वापस कराने का ऐलान किया है। महर ने इंजीनियरिंग कालेज के साथ ही पिथौरागढ़ के पानी पर भाजपा को लपेटा है।
महर ने देहरादून से फोन पर बताया कि संस्थान द्वारा छात्र, छात्राओं से 70 हजार रुपये शुल्क वसूलने संबंधी प्रश्न का जवाब देते हुए संसदीय कार्यमंत्री डा. इंदिरा हृदयेश ने स्पष्ट किया कि उक्त संस्थान सरकारी न होकर निजी सेक्टर से वित्त पोषित है। मंत्री ने ऐलान किया कि शेयर होल्डरों से 70 हजार रुपये में से 20 हजार 700 रुपये की रकम प्रत्येक विद्यार्थी को वापस कराई जाएगी। उन्होंने बताया कि सरकार ने सदन को बताया है कि सरकार संस्थान से वसूली गई लगभग 65 लाख रुपये की रकम संस्थान के 314 छात्र, छात्राओं को वापस करेगी। उन्होंने कहा अब इस संस्थान में 20 हजार 700 रुपये कम फीस पड़ेगी।
महर ने बताया कि सरकारी इंजीनियरिंग कालेज में मात्र 40 हजार शुल्क लिया जाता है। भाजपा ने इस इंजीनियरिंग कालेज को सरकारी बताकर सीमांत जिले की जनता को धोखा दिया है। उन्होंने कहा केवल राजनीतिक लाभ के लिए हो हल्ला मचाना भाजपा के लोगों का काम रह गया है। महर ने कहा कि भाजपा के लोगों के गलत कामों का खामियाजा पिथौरागढ़ की जनता को भुगतना पड़ रहा है। पिथौरागढ़ में पिछले साल पानी के लिए मिले करोड़ों रुपये भाजपा नेताओं और जल संस्थान के कारिंदों ने मिट्टी में मिलाए हैं। इंजीनियरिंग कालेज की तरह ही भाजपा ने घाट में पंप बदलने, व्यवस्था सुधारने के नाम पर भी जनता के साथ विश्वासघात किया है।

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