सहायता की उम्मीद में हाथ पीले करने की मजबूरी

Pauri Updated Sat, 25 Jan 2014 05:49 AM IST
पौड़ी। शादी के लिए सरकारी सहायता की राशि ढाई गुना बढ़ा दी गई है। बावजूद इसके कई पात्र लोगों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है। पात्र लोग सहायता मिलने की प्रत्याशा में उधार के पैसे से ही बेटी के हाथ पीले करने के लिए मजबूर हैं। बाद में कई लोगाें को सहायता नहीं मिलने से उनके सामने उधार चुकता करने की समस्या रहती है। इस वर्ष में जिले में वैवाहिक सहायता मद में विभाग के पास केवल 62.30 लाख ही हैं। जबकि 215 आवेदन निस्तारित होने शेष हैं।
अनुसूचित जाति, जनजाति के बीपीएल वर्ग के लोगों की दो पुत्रियों की शादी में सहायता और बीमार होने पर इलाज के लिए सरकारी स्तर पर मदद दी जाती है। समाज कल्याण विभाग की ओर से संचालित इस योजना में अब तक 20 हजार की सहायता दी जाती थी। अब इस वर्ष इसे बढ़ाकर पचास हजार किया गया है। विभाग के अनुसार जिले में इस वर्ष 266 लोगों ने इस योजना से लाभ लेने के लिए आवेदन किया। इनमें बीस लोगों ने इलाज के लिए सहायता मांगी। शासन से योजना में 82.40 लाख स्वीकृत किए। इसमें से 20.10 लाख की राशि से 41 आवेदकों को लाभान्वित किया जा चुका है। इनमें तीन उपचार वाले शामिल थे। 38 लोगाें को शादी के लिए सहायता मिली। अब 215 आवेदन निस्तारण के लिए शेष है।

91 आवेदकों को होना पड़ेगा निराश
समाज कल्याण विभाग के पास बीमार एवं शादी के लिए सहायता मद में 62.30 लाख शेष है। इस राशि से 124 आवेदकों ही लाभान्वित हो पाएंगे। ऐसे में 91 आवेदकों को इस वर्ष भी मायूस होना पड़ेगा। पिछले वर्ष 70 लोगाें को योजना का लाभ नहीं मिल पाया था।

ग्राम पंचायत स्तर पर करने होते हैं आवेदन
इस योजना में सहायता के लिए संबंधित व्यक्ति को बेटी के हाथ पीले करने से पहले ग्राम पंचायत स्तर पर आवेदन करना पड़ता है। जिला स्तर पर गठित समिति लाभार्थियों का चयन करती है। समिति में डीएम अध्यक्ष, सीडीओ उपाध्यक्ष, जिला समाज कल्याण अधिकारी सदस्य सचिव के साथ ही विधायक और सांसद या उनके नामित प्रतिनिधि सदस्य होते हैं।

बजट न होने से आवेदन निरस्त हो गया
पौड़ी ब्लाक निवासी रोशन लाल ने वर्ष 2012 में बेटी की शादी में सहायता के लिए आवेदन किया था। उनकी बेटी की शादी अक्तूबर 2012 को निर्धारित थी। बजट की कमी से उन्हें सहायता राशि नहीं मिल पाई। बाद में उनका आवेदन निरस्त हो गया। ऐसा ही कोट ब्लाक निवासी रमेश चंद्र के साथ भी हुआ। उनकी बेटी की शादी नवंबर 2012 में थी। बजट नहीं होने से वर्ष के अंत तक इन्हें योजना का लाभ नहीं मिल पाया। बाद में उनका आवेदन भी स्वत: ही निरस्त हो गया। इस योजना की खामी यह है कि इसमें बजट सीमित होता है। आवेदक को वर्ष के अंत तक योजना का लाभ नहीं मिलने पर उसका आवेदन स्वत: ही निरस्त हो जाता है। ऐसे में योजना का लाभ लेने वाले ज्यादातर लोगों को मायूस होना पड़ता है।

कोट-
शादी और बीमारी योजना में सीमित बजट निर्धारित है। इस वर्ष भी काफी आवेदन लंबित हैं। शासन से बजट की मांग की गई है, ताकि अधिक लोगाें को लाभ मिल सके। - -रतन सिंह रावल, प्रभारी जिला समाज कल्याण अधिकारी पौड़ी

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