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कुलपति से कर्मचारियों की वार्ता बेनतीजा

Pauri Updated Sat, 09 Feb 2013 05:31 AM IST
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श्रीनगर। गढ़वाल विवि प्रशासन और दैनिक कर्मचारियों के बीच टकराव थमने का नाम नहीं ले रहा है। शुक्रवार को दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों ने अपने बच्चों के साथ प्रशासनिक भवन में प्रदर्शन किया और धरना दिया। प्रशासन की मध्यस्थता में दोपहर बाद कुलपति से वार्ता की सूरत बनी, मगर यह पूरा प्रयास नाकाम साबित हो गया। दूसरी तरफ, दैनिक वेतन भोगी कर्मी राजेंद्र सिंह रावत व सुनील बिष्ट का अनशन दूसरे दिन भी जारी रहा। छात्र संघ अध्यक्ष सुधीर जोशी और छात्र नेता प्रमोद बलूनी भी दैनिक कर्मियों के समर्थन में आमरण अनशन पर बैठ गए हैं।
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गढ़वाल विवि के प्रशासनिक भवन में दिन भर गहमागहमी बनी रही। पूर्वाह्न 11 बजे पूर्व छात्र संघ महासचिव दर्शन सिंह दानू, अनिल पंवार, विकास चौहान और दैनिक वेतन भोगी कर्मचारी सुरेंद्र विवि के मुख्य गेट के टॉप में चढ़ गए। उन्होंने दैनिक कर्मियों के समायोजन न करने और विवि को शीघ्र खुलवाए जाने की मांग पूरी न होने पर गेट से कूदने की चेतावनी दी। मौके पर पहुंचे एसडीएम रजा अब्बास और सीओ मनोज कत्याल ने छात्रों को समझाने की कोशिश की। वार्ता कराए जाने के आश्वासन पर छात्र नीचे उतरे। करीब तीन से साढ़े पांच बजे तक विवि के हैप्रक सभागार में आंदोलनरत कर्मियों और विवि प्रशासन के बीच प्रशासन की मध्यस्थता में दो दौर की वार्ता हुई। वार्ता में शामिल शिक्षणेत्तर संघ के अध्यक्ष राजेंद्र भंडारी, सचिव मनोज नेगी, गोविंद सिंह रावत, कमलेश नैथानी, सतीश थपलियाल, पुष्कर चौहान आदि ने बिना समायोजन किए आंदोलन वापस लेने से मना कर दिया। विवि के अफसर अपने पुराने स्टैंड पर कायम रहे।


वेतन बढ़ाने का रखा प्रस्ताव
दूसरे दौर की वार्ता के दौरान समायोजन की प्रक्रिया पूरी होने तक दैनिक वेतन पर लगे तृतीय श्रेणी कर्मियों को प्रतिमाह 16 हजार और चतुर्थ श्रेणी कर्मियों को प्रतिमाह 12000 रुपए देने का प्रस्ताव कर्मचारियों ने रखा। इस पर कुलपति ने वित्त समिति के समक्ष पूरा मामला रखने की बात कही। वित्त समिति के पास मामला जाने पर देरी की आशंका प्रकट करते हुए बाद में कर्मचारियों ने प्रस्ताव ही वापस ले लिया।


कोट-
विवि सभी विकल्पों पर बातचीत करने के लिए तैयार है, लेकिन समायोजन के लिए यूजीसी से स्वीकृति लेनी पड़ेगी। प्रक्रिया शुरू करने के लिए आंदोलरत कर्मियों की तालाबंदी समाप्त की जानी जरूरी है। दैनिक कर्मियों से बढ़े हुए वेतन की रिकवरी किया जाना वित्त समिति का निर्णय है। इसको लागू करना विवि की बाध्यता है। वार्ता के दौरान कर्मचारियों द्वारा कई पदों पर नियम विरूद्ध नियुक्तियां किए जाने का आरोप लगाया गया है। इनकी जांच के लिए कमेटी बनानी पड़ेगी। इस पर गंभीरता से विचार किया जाएगा।-प्रो. एसके सिंह, कुलपति, गढ़वाल विवि।


विवि खुलवाने की मांग पर प्रदर्शन
गढ़वाल केंद्रीय विवि में पिछले पांच दिनों से ताले लटके होने के विरोध में छात्रों ने विवि गेट के सम्मुख विरोध प्रदर्शन किया। विरोध स्वरूप छात्रों ने राष्ट्रीय राजमार्ग पर जाम लगाने का प्रयास भी किया, लेकिन प्रशासन के हस्तक्षेप की वजह से वे सफल नहीं हो पाए। इसके बाद विवि के हैप्रक सभागार में आयोजित बैठक में छात्रों ने विवि के कुलपति से चल रहे गतिरोध का समाधान निकालने की मांग की। बैठक में विकास कठैत, पुष्पेंद्र पंवार, अंकित कपरवाण, दर्शन सिंह दानू, विवेक आदि शामिल रहे।

तालाबंदी पर जताई नाराजगी
श्रीनगर। उत्तराखंड कांग्रेस टास्क फोर्स के संयोजक योगेंद्र खंडूड़ी ने विवि में चल रही तालाबंदी पर नाराजगी व्यक्त की है। इस संदर्भ में उन्होंने कुलपति को लिखे पत्र में कहा है कि अगर तालाबंदी करने वालों की मांग उचित व नियमानुसार है तो उसे तुरंत स्वीकार क्यों नहीं किया जा रहा है। यदि मांग नियमानुसार नहीं है और हड़ताल गलत है, तो हड़ताल खत्म कराने के लिए कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही है।


कोट-
आंदोलनरत कर्मियों के समक्ष रिक्त पदों के लिए विज्ञापन जारी कर नियमित नियुक्ति प्रक्रिया शुरू करने सहित समायोजन के लिए यूजीसी से स्वीकृति लेने का विकल्प रखा गया है। लेकिन इसको कर्मचारी मानने को तैयार नहीं है। अक्तूबर माह में दैनिक कर्मियों को मूल वेतन व अन्य सुविधाएं दिए जाने का निर्णय लिया गया था। इस दौरान कर्मियों ने लिखित में अपनी सहमति दी थी कि यदि वित्त समिति द्वारा यह निर्णय टर्न डाउन किया जाता है तो बढ़े हुए वेतन की रिकवरी के लिए वह तैयार हैं। ऐसे में विवि में तालाबंदी का कोई औचित्य नहीं है।
प्रो. पीएस राणा, कुलसचिव, गढ़वाल विवि।
जारी-श्रीकृष्ण उनियाल

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