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अब भी फरासू क्षेत्र से दहशत का साया

Pauri Updated Sat, 29 Dec 2012 05:30 AM IST
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श्रीनगर। फरासू क्षेत्र में बृहस्पतिवार देर शाम पिंजरे में गुलदार के फंस जाने के बाद भी लोग खुद को महफूज नहीं मान रहे हैं। अब भी क्षेत्र में गुलदार का खतरा कायम है। दूसरे गुलदार की क्षेत्र में सक्रियता की सूचना है। बृहस्पतिवार को बच्चे के शव की तलाश के दौरान ग्रामीणों ने शाम को दो गुलदारों को एक ही स्थान से एक साथ निकलते देखा था। बाद में गुलदार के वन विभाग के हत्थे चढ़ जाने के बाद एक और गुलदार को शुक्रवार को भी बस्ती क्षेत्र में देखा गया।
फरासू में बुधवार शाम को मासूम किसना को निवाला बना चुका गुलदार ही पकड़ा गया है, या नहीं इसे लेकर संशय प्रकट किया जा रहा है। वन विभाग का कहना है कि पकड़ा गया गुलदार ही आदमखोर हो सकता है, क्योंकि पिंजरा उसी भवन के समीप लगाया गया था, जिस भवन के पास से गुलदार ने किसना को उठाया था। दूसरी ओर, वन्य जीवों से जुड़े अन्य विशेषज्ञ और शिकारी यह मान रहे हैं कि दो गुलदार बृहस्पतिवार शाम को एक साथ एक स्थान से निकले। इससे यह अनुमान लगाया जा सकता है कि किसना के शव को दोनों गुलदारों ने मिलकर खाया है। वन विभाग ने कड़ी चेतावनी देते हुए रात में ही रुद्रप्रयाग से पिंजरा मंगाकर एहतियात पिंजरा फिर से लगा दिया है। डीएफओ राजमणि पांडे ने कहा कि जब तक गुलदार की आवाजाही बस्ती क्षेत्र में रहेगी, पिंजरा लगा रहने दिया जाएगा। एसआई एनके बचकोटी ने बताया कि गुलदार की फरासू क्षेत्र में सक्रियता को देखते हुए शुक्रवार सांय एक ओर पिंजरा लगा दिया गया है। उन्होंने बताया कि श्रीकोट, स्वीत और फरासू सहित चार पिंजरे लगाए गए हैं।



रेस्क्यू सेंटर अल्मोड़ा भेजा गुलदार
बृहस्पतिवार शाम पिंजरे में फंसे गुलदार को शुक्रवार दोपहर बाद वन विभाग की टीम अल्मोड़ा स्थित रेस्क्यू सेंटर के लिए ले गई। इससे पहले, रात में ही उसे फरासू से पौड़ी ले जाया गया था। अल्मोड़ा के रेस्क्यू सेंटर में वर्तमान में पांच गुलदार बताए गए हैं। अपने नए साथियों के साथ फरासू में पिंजरे में फंसे गुलदार को अब अपना समय वहीं बिताना पडे़गा।

मेडिकल के लिए नहीं मिले डॉक्टर
फरासू में पिंजरे में पकड़े गए गुलदार के कैसे हालात थे। यह कितनी लंबाई-चौड़ाई का है। वन विभाग को इसकी कोई जानकारी नहीं है। यहां तक कि उन्हें यह भी नहीं मालूम कि पकड़ा गया गुलदार नर था या मादा। कारण यह है कि पिंजरे में पकड़े गए गुलदार के मेडिकल चेकअप के लिए श्रीनगर, पौड़ी तथा पाबौ में भी पशु चिकित्सक नहीं मिल पाए। ऐसे में वन विभाग के डीएफओ ने थलीसैंण के पशु चिकित्सकों से मेडिकल के लिए वार्ता की। इसलिए रेस्क्यू सेंटर पहुंचाने से पहले गुलदार का थलीसैंण में मेडिकल चेकअप कराया गया।

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