हड़ताल ने ले ली अजन्मे शिशु की जान

Pauri Updated Fri, 28 Dec 2012 05:30 AM IST
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कोटद्वार। यमकेश्वर में एएनएम की हड़ताल ने दुनिया में कदम रखने से पहले ही एक शिशु की जान ले ली। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र यमकेश्वर में महिला प्रसव पीड़ा से कराहती रही, लेकिन अस्पताल परिसर में स्थित अपने घर का एएनएम ने दरवाजा नहीं खोला। एएनएन ने महिला के परिजनों को यह कहकर लौटा दिया कि वह हड़ताल पर है। महिला को कोटद्वार लाते वक्त शिशु की रास्ते में ही मौत हो गई।
घटना बुधवार देर रात की है। यमकेश्वर प्रखंड के मुुंजरा गांव निवासी किरन देवी का अजन्मा शिशु हड़ताल की भेंट चढ़ गया। पीड़ित महिला के परिजनों ने बताया कि वे किरन को प्रसव पीड़ा होने के बाद उपचार के लिए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र यमकेश्वर लाए थे। जहां कोई डाक्टर मौजूद नहीं था। इस पर परिजन उसे डाक्टर के आवास पर ले गए। डाक्टर ने उसे प्राथमिक उपचार देने के बाद कोटद्वार जाने की सलाह दी। परिजन कोटद्वार जाने से पहले उसे लेकर अस्पताल में स्थित एएनएम के आवास पर पहुंच गए। मगर एएनएम ने दरवाजा खोलने से मना कर दिया। उसने कहा कि उनकी हड़ताल पर है। परिजनों के अनुसार, उन्हें महिला को कोटद्वार लाने के लिए अस्पताल से एंबुलेंस नहीं दी गई, जबकि अस्पताल में एंबुलेंस खड़ी थी। किसी तरह उसे प्राइवेट वाहन से कोटद्वार लाया जा रहा था। इस बीच, रास्ते में प्रसव पीड़ा और अधिक बढ़ गई, मगर सुरक्षित प्रसव नहीं हो पाया। हास्पिटल जब तक पहुंचे, शिशु की मौत हो चुकी थी। महिला के पति सोहन सिंह ने बताया कि किसी तरह किरन को एक निजी अस्पताल में पहुंचा कर उसकी जान बचाई गई, मगर स्वास्थ्य विभाग ने इस पूरे मामले में घोर लापरवाही दिखाई है।

-किरन नाम की महिला को अटेंड किया गया था। उसे अभी सातवां माह चल रहा था। काफी ब्लडिंग भी हो रही थी। इसलिए ही उसे रैफर किया गया था।-डा. विकास घिल्ड़ियाल, प्रभारी चिकित्साधिकारी यमकेश्वर।

-मामला अभी संज्ञान में नहीं है। इस प्रकरण की जांच की जाएगी। लापरवाही करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।-डा. एके सिंह, सीएमओ पौड़ी।

भारी पड़ रही हड़ताल
एएनएम की हड़ताल 57 वें दिन में प्रवेश कर गई है, मगर गतिरोध टूट नहीं पा रही है। 1979 से एरियर की भुगतान की मांग को लेकर एएनएम आंदोलित हैं। इस वजह से स्वास्थ्य सेवाओं पर बुरा असर पड़ रहा है। एएनएन का मुख्य कार्य टीकाकरण है, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को चिकित्सा उपचार देने की पूरी जिम्मेदारी उन्हीं के ऊपर है।



आधा घंटा देर होती, तो नहीं बचती किरन
यमकेश्वर से कोटद्वार तक का 80 किमी का सफर गुजरा बेहद तकलीफ में
अमर उजाला ब्यूरो
कोटद्वार। विकास खंड यमकेश्वर में तैनात एएनएम ने बुधवार रात को को जिस तरह से अमानवीयता दिखाई, उसने किरन की जान पर भी बन आई थी। डाक्टरों का कहना है कि यदि आधा घंटा और देर हो जाती, तो उसकी जान जा सकती थी।
एएनएम पिछले 56 दिनों से अपनी मांगों को लेकर हड़ताल पर हैं। यमकेश्वर से कोटद्वार का लगभग 80 किमी का सफर महिला ने प्रसव पीड़ा झेलते हुए प्राइवेट वाहन में गुजारा। परिजन बताते हैं कि महिला को यमकेश्वर से ही ब्लीडिंग शुरू हो गई थी। थोड़ी दूर चलने पर ही प्रसव होने लगा। इस वजह से बेहद असहज स्थिति बन गई। ऐसी अवस्था में लाचार परिजनों के पास कोटद्वार पहुंचने के अलावा और कोई विकल्प नहीं था। जब तक वह कोटद्वार पहुंचे, तब तक सब कुछ खत्म हो चुका था। यहां एक निजी अस्पताल में महिला को भर्ती कराया गया। परिजनों ने बताया कि डाक्टरों ने स्पष्ट कह दिया था कि वे बिलकुल सही समय पर पहुंचे। अन्यथा और भी अप्रिय स्थिति सामने आती।


108 रहती है लक्ष्मण झूला में
-यमकेश्वर ब्लाक के लिए लगाई गई 108 एंबुलेंस लक्ष्मण झूला में खड़ी रहती है। जो यमकेश्वर से 70 किमी दूर है। विकास खंड के अन्य गांवों की दूरी तो दो गुनी हो जाती है। ऐसे में यमकेश्वर के लिए 108 सेवा कारगर साबित नहीं हो पा रही है।

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