जीआईसी भृगुखाल की हालत बद से बदतर

Pauri Updated Tue, 25 Dec 2012 05:30 AM IST
यमकेश्वर। शिक्षा के प्रति सरकार की किस कदर संवेदनहीन है, इसका जीता जागता उदाहरण राजकीय इंटर कालेज भृगुखाल है। इस कालेज के भवन की देख रेख न होने के कारण इसकी स्थिति बदतर होती जा रही है।
यमकेश्वर तहसील के अंतर्गत सबसे पुराना जीआईसी भृगूखाल 1922 में प्राथमिक विद्यालय के रूप में विकसित हुआ था। वर्ष 1949 को इसे जूनियर हाईस्कूल की मान्यता मिली। तब क्षेत्र में सिर्फ चमकोटखाल, पौखाल और हनुमंती ही हाईस्कूल के विद्यालय थे। वर्ष 1965 में इसको इंटर कालेज की मान्यता मिल गई। 1966 में विज्ञान वर्ग की पढ़ाई यहां शुरू हो गई।1978 में इसको राजकीय इंटर कालेज कर दिया गया। इस विद्यालय के विकास में इतने दौर गुुजर गए, लेकिन यह आज भी 1922 के उसी प्राथमिक विद्यालय के भवन में संचालित हो रहा है। भवन में 16 कमरे स्थापित किए गए हैं, लेकिन कोई भी कमरा सही स्थिति में नहीं है।

भूमि की कमी नहीं
जीआईसी भृगूखाल के लिए ग्राम बड्यूल, जयहरी एवं कस्याली के ग्रामीणों ने भूमि दान की थी। वर्तमान में इस समय 160 नाली भूमि उपलब्ध है, लेकिन बजट नहीं मिलने से उसका सही उपयोग नहीं हो पा रहा है। ग्रामीणों ने जमीन तो दे दी, लेकिन पैसा नहीं होने से भवन निर्माण नहीं हो पा रहा है।
कोट---
-विद्यालय भवन की स्थिति बहुत दयनीय बनी हुई है। कक्षा 11 से 12 के लिए भवन कक्षों की जरूरत है। बरसात में पढ़ाई में काफी व्यवधान उत्पन्न होता है।-रविंद्र सिंह रावत, प्रधानाचार्य।
-हमने भवन की मरम्मत और नए भवन के लिए कई बार क्षेत्रीय प्रतिनिधियों के सामने मांग की है, लेकिन इस पर कोई कार्य नहीं हो पाया है।-शीशपाल, अध्यक्ष अभिभावक संघ जीआईसी भृगूखाल।

मैने खुद विद्यालय भवन का निरीक्षण किया है। भवन की स्थिति काफी खराब है। इसके लिए प्रस्ताव भेजे गए लेकिन कार्यवाई नहीं हो पाई। -आशतोष भंडारी, बीईओ यमकेश्वर।

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