साहित्यकारों ने कहा, उत्तराखंड में बिखरा है लोक साहित्य

Pauri Updated Mon, 17 Dec 2012 05:30 AM IST
पौड़ी। जन सरोकारों के लिए प्रतिबद्ध स्व. राजेंद्र सिंह रावत की स्मृति में आयोजित वीर चंद्र सिंह गढ़वाली व्याख्यानमाला में साहित्यकारों ने साहित्य को सहेजने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि लोक साहित्य और संगीत पर अभी तक बुनियादी कार्य नहीं हुआ है।
उमेश डोभाल ट्रस्ट की पहल पर ‘उत्तराखंड में लोक संगीत की दशा और दिशा’ विषय पर आयोजित व्याख्यानमाला में बतौर मुख्य वक्ता साहित्यकार डा. नंदकिशोर हटवाल ने कहा कि सूबे के गांवों में लोक संगीत बिखरा पड़ा है जिसे संग्रह करने की आवश्यकता है। सामाजिक सरोकारों के संघर्षों में उन्होंने स्व. राजू रावत को प्रेरणा स्रोत बताया। डा. विष्णु दत्त कुकरेती ने लोक साहित्य और संगीत को आम जन संचार का सशक्त माध्यम बताया। कार्यक्रम के अध्यक्ष लोक गायक नरेंद्र सिंह नेगी ने लोक साहित्य और संगीत के संवर्द्धनों को और प्रयासों की जरूरत बताई। स्व. राजू की पुत्री रैमासी रावत ने जन सरोकारों के प्रति पिता के समर्पण पर रोशनी डाली। इस मौके पर विमल नेगी के काव्य संग्रह ‘तुम्हारे गांव जाने’ पर कविता संग्रह का भी विमोचन किया गया। समारोह में वरिष्ठ रंगकर्मी गौरी शंकर थपलियाल, अनुसूया प्रसाद घायल, एसपी खर्कवाल, जीएल नौटियाल आदि ने विचार रखे। ट्रस्ट की ओर से ओंकार बहुगुणा को भी सम्मानित किया गया। ट्रस्ट के न्यासी रविंद्र रावत और गिरीश डोभाल समेत सुरेंद्र सिंह रावत, ललित कोठियाल समेत कई साहित्य प्रेमी मौजूद थे। संचालन गणेश कुखसाल ने किया।

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