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मूल निवास नीति के विरोध में धरना, प्रदर्शन

Pauri Updated Tue, 11 Dec 2012 05:30 AM IST
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कोटद्वार। प्रदेश सरकार की नई मूल निवास नीति के विरोध में आंदोलन शुरू हो गए हैं। उत्तराखंड क्रांति दल (डी) ने कोटद्वार तहसील परिसर में धरना दिया और प्रदर्शन किया। कई अन्य जगहों पर विभिन्न संगठनों की तरफ से भी कड़ी प्रतिक्रिया सामने आई है। यूकेडी-डी ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द इस नीति को वापस नहीं लिया गया, तो 14 जनवरी से प्रदेश स्तर पर सरकार के खिलाफ जन जागरूकता अभियान चलाया जाएगा। फरवरी से जिला मुख्यालय सहित तहसीलों में धरना दिया जाएगा।
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यूकेडी डी के केंद्रीय अध्यक्ष डा. शक्तिशैल कपरवाण के नेतृत्व में दल के कार्यकर्ताओं ने सोमवार को तहसील मुख्यालय में धरना दिया। कार्यकर्ताओं ने कहा कि सरकार नई मूल निवास नीति के कारण उत्तराखंड के लोग अल्पसंख्यक हो जाएंगे। इससे लोगों के अधिकार छिन जाएंगे। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में मजदूरी के लिए बंगाल, बिहार समेत कई जगहों के लोग आते हैं ऐसे में उनको मूल निवासी कैसे बनाया जा सकता है। 12 सालों में सरकार ने पहाड़ के लिए कोई नीति तो बनाई नहीं और अब पहाड़ विरोधी मानसिकता को दिखाते हुए यह तुगलकी फरमान जारी कर दिया। उन्होंने कहा जब तक नीति को वापस नहीं लिया जाता तब तक विरोध जारी रहेगा। धरना दे रहे लोगों ने सीएम से इस नीति को तुरंत वापस लेने की मांग की। धरने पर प्रवेश चंद्र नवानी, बचन सिंह, जगदीश प्रसाद, सुरेंद्र आर्य, राम सिंह चौहान, सुशील डोबरियाल, गिरीश डंडरियाल, महिपाल आर्य, केदार सिंह नेगी, शंकर प्रसाद, विनोद भट्ट आदि बैठे।

पहाड़ का अस्तित्व हो जाएगा समाप्त
श्रीनगर। उत्तराखंड क्रांति दल के केंद्रीय उपाध्यक्ष खुशहालमणि बड़थ्वाल ने कहा कि राज्य गठन के समय से उत्तराखंड में रहने वाले सभी लोगों को यहां का मूल निवासी माने जाने का निर्णय हैरानी भरा है। इस निर्णय के लागू होने पर पहाड़ का अस्तित्व समाप्त हो जाएगा, जो राज्य निर्माण के मूल उद्देश्य के विरुद्ध है। उत्तराखंड क्रांति दल इसका कड़ा विरोध करेगा। राज्य आंदोलनकारी प्रीतम सिंह ने भी इस निर्णय को राज्य में राज्य के ही मूल निवासियों को अल्पसंख्यक बनाने वाला कहा।

यमुना घाटीम में विरोध की आवाज तेज
नौगांव। मूल निवास के मामले में यमुना घाटी में भी विरोध के स्वर तेज हो गए हैं। सोमवार को हुई बैठक में विभिन्न संगठनों के पदाधिकारी शामिल हुए। वक्ताओं ने कहा कि राज्य गठन के समय यहां निवास करने वालों को मूल निवासी माना जाना उत्तराखंड के मूल निवासियों के साथ धोखा है। उन्होंने प्रदेश सरकार के इस निर्णय के विरोध में आंदोलन की चेतावनी दी। जल्द ही इस निर्णय के खिलाफ हस्ताक्षर अभियान चलाया जाएगा। बैठक में व्यापार मंडल अध्यक्ष शशि मोहन राणा, अर्जुन सिंह, राजेश रावत, विशालमणि डिमरी, विरेंद्र रावत, सुभाष उनियाल आदि मौजूद थे।
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