हनुमंती से लापता युवक का शव बरामद

Pauri Updated Fri, 07 Dec 2012 05:30 AM IST
दुगड्डा। हनुमंती गांव से लापता बिहार के युवक मुजम्मिल का शव घने जंगल से बरामद हुआ है। शव को गड्ढा खोेद कर दफनाया गया था। पुलिस ने इस मामले में चार युवकों को गिरफ्तार कर बृहस्पतिवार को कोर्ट में पेश किया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है। गिरफ्तार युवकों में एक ग्यारहवीं और दूसरा बारहवीं का छात्र है। हालांकि गिरफ्तार युवकों का कहना है कि उन्होंने हत्या नहीं की। मछली पकड़ते समय करंट लगने से मुजम्मिल की मौत हुई है। मामले की सच्चाई जानने के लिए पुलिस ने फॉरेसिंक जांच कराने का निर्णय लिया है।
हनुमंती में किराए पर रहने वाला बिहार निवासी राजमिस्त्री मुजम्मिल (32) बीती 23 नवंबर से गायब था। उसके भाई नासिर ने 27 नवंबर को राजस्व पुलिस को उसकी गुमशुदगी की तहरीर दी थी। भाई ने मुजम्मिल की हत्या की आशंका भी जताई थी, जिस पर पांच दिसंबर को हत्या का मुकदमा दर्ज किया गया था। मुजम्मिल के मोबाइल की काल डिटेल के आधार पर चार युवकों हनुमंती निवासी योगेश काला, संदीप नेगी, ग्राम दालमी सैंण निवासी संतोष रावत और संजय सिंह को गिरफ्तार कर लिया। उनकी निशानदेही पर हनुमंती से करीब डेढ़ किलोमीटर अंदर जंगल में गड्ढे में दबाया गया मुजम्मिल का शव बुधवार की रात बरामद किया। उसके सिर और कमर पर चोटों के निशान थे। बृहस्पतिवार को पोस्टमार्टम कराने के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया। आरोपियों के पास से पुलिस ने गड्ढा़ खोदकर शव दबाने में प्रयुक्त किए गए औजार भी बरामद किए हैं। मुजम्मिल की मौत के कारणों का अभी खुलासा नहीं हो पाया है, लेकिन पुलिस इस मामले को अवैध संबंधों से जोड़कर देख रही है। जांच भी इसी अनुरूप आगे बढ़ रही है।


हत्या नहीं की, करंट से हुई मौत
मुजम्मिल की हत्या के आरोप में गिरफ्तार किए गए चारों युवक अपने आपको बेकसूर बताते रहे। उनका कहना था कि उन्होंने हत्या नहीं की बल्कि मछली पकड़ने के समय करंट लगने के कारण उसकी मौत हो गई थी। वे वहां मौजूद थे, डर के कारण उन्होंने शव को छिपाने के इरादे से गड्ढे में दबा दिया था।

गले नहीं उतर रही कहानी
-पकड़े गए चारों आरोपियों का कहना है कि मछली मारते समय मुजम्मिल मर गया, जबकि गड्ढे से निकले शव के सिर से इतना खून निकला हुआ था कि चेहरे पर लगी मिट्टी भी लाल दिख रही थी। उसके सिर पर रखा पत्थर भी आधा लाल था। उसकी पीठ और हाथों पर काले निशान बने हुए थे। यदि करंट से मौत हुई होती, शरीर पर नीले निशान दिखाई देते, न कि लाल रंग।

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