फैक्ट्रियों के धुएं से हर कोई परेशान

Pauri Updated Mon, 19 Nov 2012 12:00 PM IST
कोटद्वार। जशोधरपुर इंडस्ट्रियल एरिया की तस्वीर आज भी नहीं बदल पाई है। आज भी यहां फैक्ट्रियों से धुआं निकलता रहता है वातावरण में धुंध छाई रहती है। जिससे यहां के लोग परेशान हैं।
फैक्ट्रियों से उठ रहे धुएं के कारण हो रही परेशानियों से गुस्साए ग्रामीणों ने आंदोलन किया वहीं सीएसई की रिपोर्ट में भी 17 फैक्ट्रियों को मानकों के विपरीत बताया गया। मगर इन फैक्ट्रियों पर कोई फर्क नहीं पड़ा। आज भी यहां दिन में ही धुआं छाया रहता है। इस धुंध से हर कोई परेशान है। फैक्ट्रियों से उठ रहे धुएं से वातावरण दूषित हो रहा है वहीं फैक्ट्रियों के संचालन के लिए कई मानक भी हैं लेकिन भाबर के जशोधरपुर इंडिस्ट्रयल एरिया में लोगों ने मानक की धज्जियां उड़ाई हुई हैं। काले धुएं के बीच ही लोगों के रहने की मजबूरी बनी हुई है। इस ओर अब न प्रशासन ध्यान दे रहा है न ही इंडस्ट्री की ओर से कोई कदम उठाया गया।

इंसेट
सीएसई की रिपोर्ट में थी कई फैक्ट्रियां अवैध
- फैक्ट्रियों से होने वाले प्रदूषण के खिलाफ ग्रामीणों के आंदोलन के बाद इसकी जांच सेंटर फार सांइस एंड इंवायरमेंट (सीएसई) से कराई गई थी। ग्यारह जून को सीएसई ने ग्रामीणों, फैक्ट्री संचालकों, पर्यावरण संरक्षण के साथ बैठक में रिपोर्ट पेश की थी, जिसमें 17 फैक्ट्रियों को 2008 से प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से लाइसेंस जारी नहीं किए गए थे। फैक्ट्रियों को एनओसी लेने के लिए बोर्ड के पास जाने पर मानकों पर खरी नहीं उतरने पर एनओसी नहीं दी गई। फैक्ट्री संचालकों ने बैठक में तीन महीने में सुधार करने की बात कही थी, लेकिन पांच महीने के बाद भी स्थिति जस की तस है।

स्मौग बनता है सर्दियों में
इंडस्ट्रियल एरिया में फैक्ट्रियों से उठने वाला जहरीला काला धुआं बस्ती के नीचे घूमता रहता है, जिससे सर्दियों में धुंध छाई रहती है। ठंड के कोहरे और फैक्ट्रियों के धुएं से मिलकर स्मौग बनता है। जो सामान्य धुएं से कहीं अधिक खतरनाक होता है।

क्या कहते हैं ग्रामीण
- दोपहर को फैक्ट्रियों से निकलते धुएं के कारण धुंध छा जाती है और शाम तक ऐसी ही स्थिति बनी रहती है। सांस लेना मुश्किल हो जाता है। ऐसे में किसी को भी बीमारी हो सकती है। - हेमलता देवी।

- काले धुएं से तो निजात मिलनी मुश्किल दिख रही है। इसलिए खिड़कियों को बंद करना पड़ता है। - सीमा।

- सर्दियों में धुएं की डेंस्टी अधिक होने से वह ऊपर नहीं उड़ पाता है। इससे सांस और दिल की बीमारियों से संबधित बीमारियां होने की संभावना रहती है। कोहरा अधिक रहने से धूप भी नहीं आ पाती। - डा. आईएस सामंत, सीएमएस संयुक्त चिकित्सालय कोटद्वार।

- इस मामले को लेकर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड कार्रवाई कर सकता है। यह मामला उन्हीं का है। जल्दी प्रदूषण विभाग की टीम यहां आने वाली है, फैक्ट्रियों को लाइसेंस देना या न देना उनके ही अधिकार क्षेत्र में है। - अनिल गर्ब्याल, एसडीएम।

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