एक सीनियर डाक्टर के सहारे सात सेक्शन

Pauri Updated Sun, 18 Nov 2012 12:00 PM IST
श्रीनगर। बेस अस्पताल की तस्वीर जैसी दिखती है, अमूमन हमेशा वैसी नहीं होती। यहां कई काबिल डॉक्टर भी हैं, तो अपने जेब से रुपए देकर इलाज कराने वाले डॉक्टर भी। इसके बावजूद आए दिन दर्जनों रोगियों को अव्यवस्थाओं तथा डॉक्टरों की कमी के कारण फजीहत झेलनी पड़ती है। यूं कहें कि एक अनार हैं, तो सौ बीमार हैं।
बीते 15 नवंबर को रूद्रप्रयाग रैंतोली में एक नेपाली मजदूर अचानक लोहे की सीढ़ियों पर गिरकर घायल हो गया। रैंतोली निवासी जगदंबा चमोला नाम के एक व्यवसायी ने नेपाली श्रमिक की मदद की और वे उसे अपने वाहन से बेस अस्पताल लेकर आए। अस्पताल में मालूम हुआ कि उसके सिर पर गहरी चोट है और आपरेशन करना होगा। एनेस्थेसिस्ट के सहयोग के बिना डॉक्टर ने स्वयं रिस्क लेकर इस बच्चे की जान बचाने के लिए आपरेशन किया। चमोला की मानें, तो रोगी के इलाज के लिए रातोंरात उस दिन ड्यूटी पर तैनात स्टाफ से लेकर डॉक्टरों ने जिस शिद्दत से काम किया, वह प्रेरणादायी है।
ऐसे उदाहरणों के बावजूद आए दिन बेस अस्पताल में ठीक से व्यवस्थाएं न होने से लेकर डॉक्टरों की अभद्रता तक लोगों को झेलनी पड़ती है। बेस अस्पताल के बाल रोग विभाग में एक एसआर (सीनियर रेजीडेंट) के भरोसे ही सात सेक्शन (एनआईसीयू, पीआईसीयू, भर्ती वार्ड, इमरजेंसी, लेबर कॉल, ओपीडी तथा टीचिंग) चल रहे हैं, तो एनेस्थीसिया विभाग में एक एनेस्थेसिस्ट के सहारे सर्जरी, जनरल सर्जरी, आर्थोपेडिक्स, गाइनी एंड ऑब्स, ऑफ्थो तथा ईएनटी सात विभागों के आपरेशन हो रहे हैं। इसमें इमरजेंसी आपरेशन भी शामिल हैं। दरअसल बाल रोग विभाग में वर्तमान में तीन एसआर तथा चार जेआर कार्यरत हैं, जिसमें से पीजी उत्तीर्ण एसआर सिर्फ डा.शशांक हैं। इसी तरह, एनेस्थीसिया की विभागाध्यक्ष डा.आईएस योग ही विभाग को चला रही हैं। यहां तो तकनीशियनों का टोटा भी विभाग झेल रहा है। हाल जो भी हो, परेशानी तो रोगियों को ही भुगतनी पड़ रही है।

कोट

- हर माह 15 दिन के भीतर वॉक इन इंटरव्यू कराए जा रहे हैं। इसके बावजूद रेडियोलॉजी, एनेस्थीसिया व बाल रोग विभाग के लिए फैकल्टी नहीं मिल पाई हैं। फैकल्टी की कमी से हो रही दिक्कतें हमारे संज्ञान में हैं।-डा.वीएल जहागिरदार, प्राचार्य राजकीय मेडिकल कालेज

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