भीषण आग से जूता-चप्पल का गोदाम खाक

Pauri Updated Thu, 15 Nov 2012 12:00 PM IST
कोटद्वार। दीपावली निबटते ही बुधवार की सुबह यहां जूता-चप्पल के एक बडे़ गोदाम में आग लग गई। सुबह सवेरे उठे लोगों ने गोदाम से धुएं का गुबार उठते देखा, तो अफरातफरी फैल गई। इसके बाद से लोगों की भारी भीड़ वहां जमा हो गई। आग की भयावहता इस कदर थी कि फायर ब्रिगेड को इस पर काबू पाने में छह घंटे का समय लगा। यहीं नहीं, यूपी के निकटवर्ती शहर नजीबाबाद से मदद के लिए फायर ब्रिगेड बुलानी पड़ी। आग से लाखों रुपये का सामान जलने की सूचना है।
जूते-चप्पल का ये गोदाम नजीबाबाद रोड स्थित है। आग लगने की घटना सुबह साढे़ पांच बजे की है। गोदाम मालिक शिव कुमार गर्ग का निवास इस जगह से कुछ दूरी पर है। सुबह आस-पास के लोगों को सबसे पहले आग की खबर लगी। गोदाम मालिक को आग की सूचना किसी अन्य व्यक्ति से लगी। आग लगने के आधा घंटा बाद फायर सर्विस के दो वाहन मौके पर पहुंचे, लेकिन तब तक आग की लपटें काफी फैल चुकी थीं। हर तरफ धुएं के गुबार नजर आ रहे थे। किसी तरह गोदाम के आफिस और आस पास के कमरों में रखे कुछ सामान को बाहर निकाला जा सका। आग पर लगभग अपराह्न 12 बजे काबू पाया जा सका। इंश्योरेंस कंपनी के लोगों ने भी मौका मुआयना किया। इधर, अगिभनशमन अधिकारी आरएस खाती का मानना है कि आग शार्ट सर्किट से लगी हुई मालूम होती है, लेकिन इसका खुलासा जांच के बाद ही हो पाएगा।

यूपी से मंगाए गए फायर वाहन
-आग इतनी भयंकर थी कि उत्तराखंड फायर सर्विस के एक बड़े वाहन, एक मिनी फायर कंट्रोलर और एक हैंड फायर पोर्टेबल पंप से बात नहीं बनी। नजीबाबाद से उत्तर प्रदेश फायर सर्विस के दो वाहनों को बुलाया गया। इसके बाद कड़ी मशक्कत से आग पर काबू पाया गया।


जेसीबी से तोड़ी गई गोदाम की दीवारें
-जूतों के जिस गोदाम में आग लगी थी, वह काफी बड़ा था। आगे की ओर से आग पर काबू नहीं हो पा रहा था। इसके बाद जेसीबी से गोदाम की पीछे की दीवारों को तोड़ा गया। दीवारों को तोड़ने के बाद फायर सर्विस के कुछ जवानों ने मोर्चा संभाल कर किसी तरह आग पर काबू पाया। मौके पर फायर सर्विस आफिसर आरएस खाती, सीओ अरुणा भारती, कोतवाल अंशु चौधरी पुलिस फोर्स सहित मौजूद रहे। दूसरी ओर, एसडीएम अनिल गर्ब्याल भी सूचना मिलने पर मौके पर पहुंचे। स्वास्थ्य मंत्री सुरेंद्र सिंह नेगी और पूर्व विधायक शैलेंद्र सिंह रावत ने भी घटनास्थल पर पहुंचकर जानकारी हासिल की।
16 साल पहले भी लगी थी आग
कोटद्वार। बुधवार को जिस जगह आग लगने की घटना हुई है, वहां पर 16 साल पहले तक जूता फैक्ट्री हुआ करती थी। गोदाम मालिक के अनुसार वर्ष 1996 में जूता फैक्ट्री में आग लगने के बाद इसे बंद कर दिया गया था। उसके बाद अब वहां पर गोदाम है। जिस जगह गोदाम बनाया गया है, उसके आस-पास घनी बस्ती है। आग लगने के बाद से बस्ती के लोगों में डर का माहौल है। हालांकि छह घंटे मेें आग पर काबू पाया गया, मगर फायर सर्विस को मोर्चा लेने में अगर थोड़ी भी देर होती, तो बस्ती तक आग फैल सकती थी। गोदाम के दोनों ओर रिहायशी क्षेत्र है। इतना ही नहीं इसके पीछे की ओर बिजली का ट्रांसफार्मर भी है। गोदाम से सटे भवन की दूसरी मंजिल में रसोई गैस का सिलेंडर रखा हुआ था। इसके साथ ही गोदाम के पीछे की ओर कुछ मकान गोदाम की दीवार से सटे हुए थे। इनमें भी गैस सिलेंडर के आग पकड़ने का खतरा बना हुआ था।

काम नहीं आए अगिभनशमन यंत्र
-आग से सुरक्षा के लिए लगे अगिभनशमन यंत्रों की क्या स्थिति रही, इस बारे में भी कुछ पता नहीं है। चूंकि आग को बुझाने में उनका कोई भी प्रयोग नहीं हो सका। इतने बड़े गोदाम की सुरक्षा भी कामचलाऊ ही रही।

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