सजने लगा बताशों के खिलौनों का बाजार

Pauri Updated Wed, 07 Nov 2012 12:00 PM IST
कोटद्वार। दीपावली पर्व के अवसर पर बताशे के खिलौनों का बाजार सजने लगा है। यूं तो दीपावली में मिठाइयों की डिमांड ज्यादा होती है लेकिन इन खील बताशों के बिना दीपावली की पूजा पूरी नहीं होती। ऐसे में दीपावली त्योहार पर खील बताशे का अलग ही महत्व है। दीपावली की वास्तविक मिठाई यही मानी जाती है। कुछ सालों से इन बताशों की मांग हर साल बढ़ती ही जा रही है। कोटद्वार से पहाड़ तक बताशों की सप्लाई होती है। बताशों की 15 से 20 कुंतल तक की बिक्री हो जाती है। यह बताशे भी विभिन्न आकार हाथी, घोड़ा, चिड़िया, मंदिर, सूरज, हिरन आदि के होते हैं और बच्चे इन्हें बहुत पसंद करते हैं। पिछले साल यह बताशे पचास रुपये किलो बिके थे, लेकिन अब यह 70 से 80 रुपये किलो बिक रहे हैं। पहाड़ में चीनी से बने इन खिलौनों की मांग तो काफी है लेकिन इनको तैयार करने वाले कारीगर यहां नहीं मिलते। इसके लिए सहरानपुर और बिजनौर आदि से कारीगर बुलाए जाते हैं।

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